जलालाबाद में बंद होगा भारतीय वाणिज्य दूतावास? पाकिस्तान की डिमांड पर तालिबान ने दिया जवाब

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Taliban Pakistan Meeting: पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच कंधार में एक बड़ी बैठक हुई है, जिसमें पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल इनायत हुसैन ने किया, जबकि तालिबान की ओर से इस बैठक में कंधार के गवर्नर मुल्ला शिरीन और तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद जैसे दूसरे दर्जे के अधिकारियों ने किया.

बता दें कि इस बैठक में पाकिस्तान ने तालिबान के सामने कई मांगे रखीं, जिसमें जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करना भी शामिल था. इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान नेताओं को पाकिस्तान को सौंपना, रूस से ईरान भेजी जाने वाली लॉजिस्टिक सहायता को रोकना और पाकिस्तान में मौजूद तालिबान की संपत्तियों की बिक्री की भी मांग रखी गई.

जलालाबाद में बंद होगा भारतीय वाणिज्य दूतावास?

तालिबान सरकर में अफगानिस्तान के न्याय मंत्री फजल अहमद मानवी ने बताया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने जलालाबाद में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की मांग की है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की मांग पर तालिबान ने कहा है कि वे जलालाबाद में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने पर सहमत हैं. हालांकि, इसके बदले में उसी शहर में मौजूद पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास को भी बंद किया जाना चाहिए.

टीटीपी नेताओं को पाकिस्तान को सौंपेगा तालिबान

इसके अलावा इस बैठक में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नेताओं को सौंपने की भी मांग की थी. पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान को टीटीपी लड़ाकों के ठिकानों का पता और कोऑर्डिनेट्स भी दिए हैं, जिसपर तालिबान ने सकारात्मक रुख दिखाया है. हालांकि, इसके बदले में उन्होंने पाकिस्तान की धरती पर मौजूद अपने विरोधियों (आईएसआईएस) के सभी ट्रेनिंग कैंप और आतंकी अड्डों को बंद करने की मांग की है, इस मामले में भी  तालिबान ने पाकिस्तान को कुछ दस्तावेज सौंपे हैं, जिनमें तालिबान विरोधियों के मिलिट्री कैंप, ट्रेनिंग साइट और ऑफिस की जानकारियां लिखी हैं.

पाकिस्तान में तालिबान नेताओं की संपत्तियां बेचने पर सहमति

इतना ही नही, तालिबान ने पाकिस्तान में मौजूद तालिबान नेताओं की संपत्तियों को बेचने पर भी सहमति जताई है. हालांकि, तालिबान ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान इसे मौजूदा बाजार भाव में खरीदे. दरअसल, पाकिस्तान में बड़ी संख्या में तालिबान नेताओं के मकान, खेती-बाड़ी की जमीनें और दूसरी अचल संपत्तियां हैं. तालिबान नेताओं ने ये संपत्तियां तब बनाई थी, जब वे अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमलों के डर से पाकिस्तान में छिपे हुए थे. पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को इसकी पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने अमेरिका से ये बातें छिपाई थी.

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