6 नहीं 4 साल का ही रहेगा नए अग्निवीरों का कार्यकाल, सिर्फ पुरानी भर्तियों पर ही लागू होंगे ‘अग्निपथ’ में बदलाव

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Agnipath Bharti Yojana: साल 2022 केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘अग्निपथ’ योजना में नए बदलावों को लेकर बना संशय खत्म हो गया है. सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘अग्निपथ’ योजना में किए गए नए बदलाव सिर्फ उन नौ बैचों के अग्निवीरों पर लागू होंगे, जो पहले से ही सेवा में हैं. यानी दिसंबर 2026 के बाद भर्ती होने वाले लोग, कम से कम अभी के लिए, मूल चार साल वाले मॉडल के तहत ही काम करेंगे.

रक्षा अधिकारियों ने बताया कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान द्वारा मंगलवार को घोषित किए गए ये बदलाव सिर्फ उन्हीं नौ बैचों तक सीमित हैं. नए रंगरूटों यानी भर्ती होने वालों के लिए नियमों की समीक्षा बाद में की जाएगी, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि सशस्त्र बलों को ‘समय और परिस्थिति’ के हिसाब से क्या जरूरत है.

इस योजना का कोई स्थायी बदलाव नहीं

यह बात इसलिए अहम हैं क्योंकि पहली घोषणा में सेवा अवधि को दो साल और बढ़ा दिया गया था, जिससे कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि क्या सरकार चुपचाप चार साल वाले मॉडल को पूरी तरह से खत्म कर रही है. इस स्पष्टीकरण के मुताबिक, ऐसा नहीं है. यह सिर्फ उन लोगों के लिए एक अंतरिम व्यवस्था है, जो पहले से ही सेवा में हैं, न कि इस योजना का कोई स्थायी बदलाव.

9 सर्विंग बैचों के लिए क्या बदलाव?

हर बैच के पहले 25 प्रतिशत सैनिक चार साल बाद भी रेगुलर कैडर में शामिल होते रहेंगे, लेकिन बाकी 75 प्रतिशत सैनिक, जो पहले चार साल बाद सेवा छोड़ देते, उन्हें अब दो साल का एक अतिरिक्त कार्यकाल यानी सेकंड एंगेजमेंट दिया जाएगा. यह अवधि पूरी होने पर, वे रेगुलर कैडर में शामिल हो सकेंगे. इसमें संख्या की कोई सीमा नहीं होगी, बशर्ते वे सेवा में बने रहने के इच्छुक हों, शारीरिक रूप से फिट हों और उनका अनुशासनात्मक रिकॉर्ड साफ-सुथरा हो.

इन नियमों में नहीं हुआ कोई बदलाव

व्यावहारिक रूप से, अब कार्यरत बैचों के हर अग्निवीर के पास छह साल बाद रेगुलर सैनिक बनने का रास्ता मौजूद है. सरकार इसे ‘रोलबैक’ नहीं, बल्कि एक ‘अतिरिक्त कार्यकाल’ यानी एडिशनल एंगेजमेंट पीरियड कह रही है. चार साल की मूल अवधि बनी रहेगी और इसके अंत में 25 फीसदी सैनिकों को रेगुलर कैडर में शामिल करने का नियम भी वैसा ही रहेगा. ये अतिरिक्त दो साल बाकी सभी सैनिकों को रेगुलर फोर्स में शामिल होने से पहले सेवा में बने रहने का एक और मौका देते हैं.

क्या सभी को शामिल कर लिया जाएगा?

हां, लेकिन कुछ शर्तों के साथ. जानकारी के मुताबिक, पहले 25 फीसदी लोगों को चार साल बाद शामिल कर लिया जाएगा, जबकि बाकी लोगों को पहले दो साल की सेवा पूरी करनी होगी. पुराने नियमों के तहत, हर बैच में से सिर्फ एक-चौथाई लोगों को ही रखा जा सकता था. अब दूसरे ग्रुप के लिए कोई सीलिंग यानी ऊपरी सीमा नहीं है.

लेकिन यह अपने आप नहीं होगा. एक अग्निवीर को खुद आगे बने रहने की इच्छा होनी चाहिए, उसे फिटनेस मानकों को पास करना होगा और उसका रिकॉर्ड साफ-सुथरा होना चाहिए. यह रास्ता हर योग्य शख्स के लिए मौके खोलता है. लेकिन, यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि प्रदर्शन कैसा भी हो, आपको जगह मिल ही जाएगी.

सीनियरिटी का क्या होगा?

सरकार के इस ऐलान के बाद सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यही थी. क्या वे 75 प्रतिशत सैनिक, जो दो साल की देरी से रेगुलर कैडर में शामिल होंगे, बाद के बैचों के उन सैनिकों से जूनियर हो जाएंगे, जो पहले ही रेगुलर कैडर में आ चुके हैं?

सरकार का कहना है कि ऐसा नहीं होगा. जब वे अपने अतिरिक्त दो साल पूरे करके रेगुलर सैनिक बन जाएंगे, तो उनकी रैंक ठीक उन बैचमेट्स के बाद होगी, जो चार साल पूरे होने पर रेगुलर कैडर में शामिल हुए थे. देर से शामिल होने की वजह से वे बाद के बैचों के सैनिकों से नीचे नहीं जाएंगे.

क्या यह एक रोलबैक है?

सरकार का कहना है कि ऐसा नहीं है. मूल ढांचे में चार साल की सेवा का प्रावधान था, जिसमें हर बैच के 25 फीसदी तक लोगों को सेवा में बनाए रखा जाना था. नए नियमों के तहत, अभी सेवा दे रहे बैचों के बाकी 75 फीसदी लोगों के लिए दो साल की एक और अवधि जोड़ दी गई है.

अधिकारी ‘सेवा अवधि बढ़ाने’ और ‘भर्ती मॉडल बदलने’ के बीच फर्क बता रहे हैं. शुरुआती चार साल की अवधि वैसे ही बरकरार है. बदलाव बस इतना है कि जो लोग पहले चार साल पूरे होने पर सेवा छोड़ देते, उनके लिए अब आगे बने रहने का एक और रास्ता खुल गया है.

और भविष्य के बैचों का क्या?

दिसंबर 2026 के बाद शामिल होने वाले लोग मूल चार साल के कार्यकाल के तहत काम करेंगे. अधिकारियों का कहना है कि इन बैचों के लिए नियमों की समीक्षा सशस्त्र बलों की जरूरतों और उस वक्त की परिस्थितियों के आधार पर की जाएगी.

‘समय और गुंजाइश’ वाली शब्दावली से पता चलता है कि सरकार छह साल के एक स्थायी मॉडल को लागू करने के बजाय, भविष्य में बदलाव की गुंजाइश रखना चाहती है. फिलहाल, यह नई व्यवस्था केवल उन नौ बैचों पर लागू होती है, जो पहले से ही सेवा में हैं. इसके अलावा किसी और पर नहीं.

आने वाले वक्त में भर्ती होने वालों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए. हो सकता है कि उनमें से कई लोगों ने इस ऐलान को चार साल से छह साल के स्थायी बदलाव के रूप में समझा हो, लेकिन ऐसा नहीं है.

सशस्त्र बलों के लिए, इस व्यवस्था से प्रशिक्षित कर्मी लंबे वक्त तक सेवा में बने रहेंगे और बाद में उन्हें नियमित कैडर में शामिल किया जा सकेगा, जबकि नई भर्तियों के लिए चार साल का ढांचा ही लागू रहेगा.

क्या दो साल का यह दूसरा कार्यकाल आगे चलकर ‘अग्निपथ’ योजना का स्थायी हिस्सा बन जाएगा, यह अभी भी एक खुला सवाल है. फिलहाल, सरकार ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि जो लोग पहले से सेवा में हैं, वे एक अलग रास्ते पर हैं. वहीं, जो लोग दिसंबर 2026 के बाद शामिल होंगे, वे एक अलग रास्ते पर होंगे.

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