Eclipse On Planets: दुनिया भर के अलग-अलग देशों में मंगलवार को सूर्य ग्रहण की वजह से रिंग ऑफ फायर देखने को मिला. ऐसे में क्या आपने भी कभी सोचा है कि क्या पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर ग्रहण का प्रभाव पड़ता है या नहीं. स्पेस साइंस के मुताबिक, हमारे सोलर सिस्टम में कई दूसरे ग्रहों पर भी ग्रहण होते हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि वे धरती पर दिखने वाले ग्रहण से कितने अलग होते हैं.
किसी भी ग्रह पर ग्रहण क्यों होता है?
दरअसल, जब कोई चांद सूरज और उसके ग्रह के बीच से गुजरता तो उसे ही सूर्य ग्रहण कहते है. इससे ग्रह की सतह पर छाया पड़ती है. चांद का साइज, ग्रह से उसकी दूरी और सूरज के मुकाबले ग्रह की जगह यह तय करती है कि ग्रहण पूरा होगा या फिर थोड़ा. धरती पर चांद पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज को पूरी तरह से ढक लेता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साइज दूरी का एक काफी कम होने वाला संयोग होता है. दूसरे ग्रहों पर चीजें काफी अलग दिखती हैं.
मंगल ग्रह पर ग्रहण
मंगल ग्रह के दो छोटे चांद हैं. इन्हें फोबोस और डीमोस कहा जाता है. लेकिन दोनों ही सूरज को पूरी तरह से ढकने के लिए काफी छोटे हैं. यही वजह है कि मंगल ग्रह पर टोटल सोलर एक्लिप्स नहीं होता. इसके बजाय मंगल ग्रह पर पार्शियल एक्लिप्स दिखेगा. इसमें एक छोटी सी काली आकृति थोड़ी देर के लिए सूरज की डिस्क को पार करती है.
जुपिटर पर ग्रहण
बड़े ग्रह जुपिटर के दर्जनों चांद हैं, जिसमें चार बड़े चांद शामिल हैं. इनका नाम आयो, यूरोपा, गैनीमेड और कैलिस्टो है. यह बड़े चांद रेगुलर तौर पर जुपिटर के बादलों के ऊपर बड़ी परछाई डालते हैं. वह टोटल सोलर एक्लिप्स काफी ज्यादा आम है और स्पेसक्राफ्ट की तस्वीरों में ग्रहों के रंगीन एटमॉस्फेयर में घूमती हुई काली गोल परछाइयां कैप्चर हुई हैं.
सैटर्न, यूरेनस और नेपच्यून पर ग्रहण
इन सभी ग्रहों के कई चांद हैं जिस वजह से एक्लिप्स होना काफी मुमकिन है. हालांकि नेप्चून पर एक्लिप्स काफी कम समय के लिए होते हैं. ऐसे इसलिए क्योंकि यह सूरज से काफी दूर है. इस वजह से सूरज का साइज काफी छोटा दिखता है और इसकी ज्योमेट्री की वजह से कम समय के ग्रहण होते हैं.
प्लूटो पर ग्रहण
बता दें कि प्लूटो पर भी ग्रहण होते हैं. इसका बड़ा चांद शैरन टाइडली लॉक्ड है और प्लूटो की तुलना में अनुपात में बड़ा है. उनका अनोखा अलाइनमेंट चांद को प्लूटो पर पूर्ण सूर्य ग्रहण करने देता है.
मरकरी और वीनस पर ग्रहण
मरकरी और वीनस के कोई नेचुरल चांद नहीं हैं. सूरज की रोशनी को रोकने के लिए चांद के बिना इन ग्रहों पर आमतौर पर सूर्य ग्रहण नहीं होते.
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