Rajasthan Tradition: पाली के काणा गांव में अजीब परंपरा, पिता बनने पर युवकों की होती है लाठियों से पिटाई

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Rajasthan Sampa Ger Tradition: जब किसी घर में नया सदस्य आता है और कोई युवक पहली बार पिता बनता है, तो परिवार में खुशियों का माहौल होता है. लेकिन राजस्थान के पाली जिले के देसूरी क्षेत्र के काणा गांव में पिता बनने के बाद एक अलग ही परंपरा निभाई जाती है. यहां रंगपंचमी के दिन नए पिता बने युवकों को एक खास रस्म से गुजरना पड़ता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘सांपा गेर’ कहा जाता है.

रंगपंचमी पर निभाई जाती है अनोखी रस्म

काणा गांव में हर साल रंगपंचमी के अवसर पर यह परंपरा निभाई जाती है. गांव में पिछले एक साल के दौरान जो युवक पहली बार पिता बने होते हैं, उन्हें इस रस्म में शामिल होना पड़ता है. इस दौरान पूरा गांव इस आयोजन को देखने के लिए इकट्ठा होता है.

महिलाएं करती हैं लकड़ियों से प्रहार

परंपरा के अनुसार गांव की महिलाएं दोपहर में ही आक के पेड़ की कच्ची और लचीली लकड़ियां इकट्ठा कर लेती हैं. शाम को गांव के चौक में करीब 50 फीट लंबा रास्ता बनाया जाता है. इस रास्ते के दोनों ओर महिलाएं लकड़ियां लेकर खड़ी हो जाती हैं. जब नया पिता इस रास्ते से गुजरता है तो महिलाएं उस पर लकड़ियों से प्रहार करती हैं. युवक को इस मार को सहते हुए गलियारे के दूसरे छोर तक पहुंचना होता है.

नारियल तोड़ना होता है लक्ष्य

इस रस्म के दौरान युवक को गलियारे के अंत में बंधे नारियल को तोड़ना होता है. नारियल तोड़ने के बाद उसे उसी रास्ते से वापस लौटना पड़ता है. पूरे समय महिलाएं लकड़ियों से प्रहार करती रहती हैं.

इस परंपरा में इनाम भी तय होता है. अगर कोई युवक दो बेटों का पिता बना है तो उसे चार आधे नारियल मिलते हैं, जबकि बेटी के पिता को दो आधे नारियल दिए जाते हैं.

ग्रामीण मानते हैं आस्था और सुरक्षा का प्रतीक

बाहरी लोगों को यह परंपरा अजीब या कठोर लग सकती है, लेकिन गांव के लोगों के लिए यह उनके पूर्वजों की धरोहर है. ग्रामीणों का मानना है कि इस रस्म को निभाने से पिता और उसके बच्चे पर आने वाली संभावित परेशानियां दूर हो जाती हैं.

हजारों लोग देखने आते हैं यह आयोजन

रंगपंचमी के दिन जब ‘सांपा गेर’ की रस्म शुरू होती है तो पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है. गांव की छतों, दीवारों और चौक में बड़ी संख्या में लोग इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए जमा हो जाते हैं. ढोल-नगाड़ों की आवाज और लोगों की भीड़ के बीच यह आयोजन काफी रोमांचक दिखाई देता है.

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