16 September 2026 Ka Panchang: बुधवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

16 September 2026 Ka Panchang: 16 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी. बुधवार के दिन पड़ रही यह तिथि सुबह 9 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक वैधृति योग रहेगा. वैधृति योग को स्थिर कार्यों के लिए ठीक माना जाता है, जबकि भाग-दौड़ वाले काम या यात्रा के लिए इसे उपयुक्त नहीं माना जाता. बुधवार को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा. ऐसे में दिनभर के शुभ-अशुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय जानना चाहते हैं तो 16 सितंबर का पंचांग यहां देख सकते हैं.

16 सितंबर 2026 का पंचांग

  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि: सुबह 9 बजे तक, इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी.
  • वैधृति योग: दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक.
  • विशाखा नक्षत्र: शाम 5 बजकर 23 मिनट तक.

16 सितंबर 2026 के शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से 05:39 बजे तक.
  • प्रातः संध्या: सुबह 05:16 बजे से 06:26 बजे तक.
  • अभिजित मुहूर्त: कोई नहीं.
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:36 बजे से 03:24 बजे तक.
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:40 बजे से 07:04 बजे तक.
  • सायाह्न संध्या: शाम 06:40 बजे से 07:51 बजे तक.
  • अमृत काल: सुबह 07:50 बजे से 09:34 बजे तक.
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 05:22 बजे से 17 सितंबर की सुबह 06:26 बजे तक.
  • अमृत सिद्धि योग: शाम 05:22 बजे से 17 सितंबर की सुबह 06:26 बजे तक.
  • रवि योग: शाम 05:22 बजे से 17 सितंबर की सुबह 06:26 बजे तक.

16 सितंबर 2026 को राहुकाल का समय

  • दिल्ली: दोपहर 12:16 बजे से 01:48 बजे तक.
  • मुंबई: दोपहर 12:33 बजे से 02:05 बजे तक.
  • चंडीगढ़: दोपहर 12:17 बजे से 01:50 बजे तक.
  • लखनऊ: दोपहर 12:01 बजे से 01:33 बजे तक.
  • भोपाल: दोपहर 12:15 बजे से 01:47 बजे तक.
  • कोलकाता: सुबह 11:31 बजे से दोपहर 01:03 बजे तक.
  • अहमदाबाद: दोपहर 12:34 बजे से 02:06 बजे तक.
  • चेन्नई: दोपहर 12:04 बजे से 01:35 बजे तक.

16 सितंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 06:06 बजे.
  • सूर्यास्त: शाम 06:24 बजे.

16 सितंबर को रहेगा विशाखा नक्षत्र

विशाखा 27 नक्षत्रों में 16वां नक्षत्र माना जाता है. इसका अर्थ विभाजित या एक से अधिक शाखाओं वाला बताया गया है. विवाह आदि अवसरों पर सजाए जाने वाले घर के द्वार को विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है. विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं. इसके तीन चरण तुला राशि में और चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है. इसी वजह से तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर विशाखा नक्षत्र का प्रभाव माना जाता है. विशाखा नक्षत्र को शक्ति, समृद्धि, सुंदरता, उपलब्धियों और खुशियों से जोड़कर देखा जाता है. इस नक्षत्र में कारीगरी, चित्रकारी और औषधि से संबंधित कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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