22 January 2026 Ka Panchang: गुरुवार का पंचांग, जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
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22 January 2026 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है. ज्योतिष हिंदू पंचांग से रोजाना शुभ अशुभ मुहूर्त राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं. आइए काशी के ज्योतिष से जानते हैं 22 जनवरी, दिन गुरुवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के बारे में…

आज का पंचांग 

22 जनवरी को माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और गुरुवार का दिन है. चतुर्थी तिथि गुरुवार देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी. 22 जनवरी को शाम 5 बजकर 38 मिनट तक वरीयान योग रहेगा. साथ ही गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा. इसके अलावा 22 जनवरी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाएगा.

22 जनवरी 2026 का शुभ मुहूर्त

  • माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि– 22 जनवरी 2026 को देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक
  • शतभिषा नक्षत्र– 22 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक
  • वरीयान योग– 22 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 38 मिनट तक
  • 22 जनवरी 2026 व्रत-त्यौहार– विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 01:52 – 03:12 PM
  • मुंबई- दोपहर 02:14 – 03:38 PM
  • चंडीगढ़- दोपहर 01:53 – 03:12 PM
  • लखनऊ- दोपहर 01:39 – 02:59 PM
  • भोपाल- दोपहर 01:54 – 03:16 PM
  • कोलकाता- दोपहर 01:11 – 02:33 PM
  • अहमदाबाद- दोपहर 02:13 – 03:35 PM
  • चेन्नई- दोपहर 01:47 – 03:13 PM

सूर्य और चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 7:13 AM

  • सूर्यास्त – 6:03 PM
  • चन्द्रोदय – Jan 22 9:24 AM
  • चन्द्रास्त – Jan 22 9:26 PM

विनायक गणेश चतुर्थी व्रत

हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक श्री गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विशेष रूप से तिल चतुर्थी, कुन्द चतुर्थी या तिलकुन्द चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा में तिल और कुन्द के फूलों का विशेष महत्व माना जाता है. माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत के साथ-साथ उमा चतुर्थी के रूप में भी मनाया जाता है.

इस अवसर पर विशेष रूप से महिलाएं कुन्द सहित अन्य पुष्पों, गुड़ और नमक के साथ माता गौरी की पूजा करती हैं. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इसलिए इस दिन भगवान श्री गणेश के साथ-साथ माता गौरी की विधिवत पूजा का विधान बताया गया है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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