Agarbatti Rules for Puja: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती जलाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जिससे पूजा स्थल का माहौल सुगंधित और भक्तिमय हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा में अगरबत्ती जलाने को लेकर भी कुछ धार्मिक मान्यताएं बताई गई हैं कि कितनी अगरबत्ती जलानी चाहिए और दीपक को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…
बता दें कि घर के मंदिर में पूजा करते समय अगरबत्ती की संख्या का भी ध्यान रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में एक या तीन अगरबत्ती जलाने से बचना चाहिए. इसकी जगह 2, 5, 7, 9 या 11 अगरबत्ती जलाने की परंपरा बताई गई है. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है.
दीपक का पात्र हमेशा रखें साफ
मान्यता के अनुसार, जिस पात्र में पूजा का दीपक जलाया जाता है, उसे हमेशा साफ रखना चाहिए. वहीं यदि पिछले दिन की बाती पूरी तरह जलने के बाद उसमें राख या कोई अवशेष बचा है तो उसे इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए. उसे एक जगह एकत्र करके रखना चाहिए. दीपक के पात्र को साफ करने के बाद ही उसमें नई बाती और तेल या घी डालकर दीपक जलाना चाहिए.
दीपक की लौ से न जलाएं अगरबत्ती
पूजा के दौरान एक और बात का ध्यान रखना चाहिए. पंडित कल्कि राम के मुताबिक, जलते हुए दीपक की लौ से अगरबत्ती नहीं जलानी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में इसे उचित नहीं माना गया है. इसलिए अगरबत्ती को अलग से जलाना चाहिए और दीपक की लौ से उसे जलाने से बचना चाहिए.
अमावस्या और पूर्णिमा पर करें यह उपाय
पूजा में इस्तेमाल की गई बातियों को एक जगह एकत्र करके रखा जा सकता है. अमावस्या या पूर्णिमा के दिन इन बातियों में थोड़ा कपूर रखकर जलाने और उसके धुएं को पूरे घर में दिखाने की परंपरा भी बताई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इससे घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है.