सत्यनारायण व्रत से लेकर व्यास पूजा तक…गुरु पूर्णिमा पर महापर्वों का महासंगम, एक साथ मनाए जाएंगे ये 6 महापर्व

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Guru Purnima 2026: इस साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि अत्यंत विशेष मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहे हैं. बता दें कि इस बार 29 जुलाई दिन बुधवार को आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा, जिसे गुरु पूर्णिमा या आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा इस बार एस दिन  सत्यनारायण व्रत, बुधवार व्रत, व्यास पूजा और शिव शयनोत्सव का पावन संयोग बन रहा है.

ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार, एक ही दिन इन सभी पर्वों का संगम साधना, ज्ञान, भक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. श्रद्धालुओं को इस दिन गुरु पूजन, भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के साथ व्रत एवं दान-पुण्य करने का अवसर मिल रहा है. आइए जानते हैं इस दुर्लभ धार्मिक संयोग का महत्व…

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. मान्यता है कि गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं. ऐसे में इस दिन अपने गुरु का पूजन, आशीर्वाद प्राप्त करना तथा शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेना विशेष फलदायी माना जाता है.

आषाढ़ी पूर्णिमा का महत्व

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. यह दिन स्नान, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान करने से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है. साथ ही पितरों के नाम का भोजन और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है.

सत्यनारायण व्रत का महत्व

वहीं, पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है. इस दिन सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन करने से परिवार में सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की धार्मिक मान्यता है. श्रद्धालु पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित कर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि और माता लक्ष्मी की कृपा रहती है.

बुधवार व्रत का महत्व

इस बार पूर्णिमा तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है. बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुधदेव को समर्पित है. इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना और व्रत करने का विधान है. मान्यता है कि इस दिन गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक, व्यापार, शिक्षा और वाणी से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

व्यास पूजा का महत्व

इसके अलावा गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत और अनेक पुराणों की रचना कर सनातन ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया. इसलिए इस दिन व्यास पूजा कर उन्हें आदिगुरु के रूप में स्मरण किया जाता है.

शिव शयनोत्सव का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान शिव के शयनोत्सव का भी आयोजन किया जाता है. जिस तरह देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा के लिए चले जाते हैं, ठीक उसी तरह भगवान शिव भी शयन के लिए चले जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार रूद्र संभालते हैं. कई शिव मंदिरों में विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और शयन आरती की जाती है. श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं.

Latest News

Patanjali Insurance: बाबा रामदेव की पतंजलि की बीमा सेक्टर में एंट्री, IRDAI ने 4,500 करोड़ रुपये की डील को दी मंजूरी

पतंजलि आयुर्वेद अब बीमा कारोबार में उतरने जा रही है. IRDAI ने मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के 4,500 करोड़ रुपये के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है. इस डील के बाद पतंजलि कंपनी की मुख्य प्रमोटर बनेगी.

More Articles Like This