Hanuman Jayanti Special: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से बरसती है प्रभु श्रीराम की कृपा, जानें बजरंगबली को क्यों अर्पित किया जाता है सिंदूर

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Hanuman Jayanti Special: आज 2 अप्रैल को पूरे देश में हनुमान जयंती का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. जगह-जगह सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हो रहा है.

भक्त बजरंगबली के जयकारे लगाते हुए उनकी आराधना कर रहे हैं और अपने जीवन से संकटों को दूर करने की प्रार्थना कर रहे हैं. हनुमान जयंती के अवसर पर विशेष रूप से प्रसाद, भोग और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है.

पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व

हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, बिना सिंदूर के बजरंगबली की पूजा अधूरी मानी जाती है. इस दिन भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करते हैं और उनसे शक्ति, साहस और सफलता की कामना करते हैं.

मान्यता है कि सिंदूर चढ़ाने से न केवल हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, बल्कि भगवान श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. यही कारण है कि मंदिरों में आज सिंदूर अर्पित करने के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं.

पौराणिक कथा: सिंदूर और हनुमान जी की अनोखी भक्ति

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं. उस समय हनुमान जी वहां उपस्थित थे. उन्होंने आश्चर्य से पूछा कि माता आप यह सिंदूर क्यों लगा रही हैं. माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है और यह वे भगवान श्रीराम की दीर्घायु के लिए लगा रही हैं.

यह सुनकर हनुमान जी की भक्ति का अद्भुत रूप सामने आया. उन्होंने सोचा कि यदि थोड़ा सा सिंदूर लगाने से प्रभु श्रीराम की आयु बढ़ती है, तो अगर वे अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लें तो प्रभु की आयु और भी अधिक बढ़ेगी. इसके बाद हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया.

भगवान श्रीराम का आशीर्वाद

जब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को पूरे शरीर पर सिंदूर लगाए देखा, तो उन्होंने इसका कारण पूछा. हनुमान जी ने विनम्रता से बताया कि उन्होंने यह सब प्रभु की दीर्घायु के लिए किया है. हनुमान जी की इस निःस्वार्थ भक्ति और समर्पण को देखकर भगवान श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए. उन्होंने आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और उसे उनका भी आशीर्वाद प्राप्त होगा.

आज भी जारी है यह परंपरा

तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि हनुमान जी को सिंदूर अर्पित किया जाता है. धार्मिक विश्वास है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भय समाप्त होता है और व्यक्ति को शक्ति और साहस प्राप्त होता है. हनुमान जयंती के दिन यह परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और देशभर के मंदिरों में इसका विशेष आयोजन होता है.

भक्ति, शक्ति और समर्पण का पर्व

हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह भक्ति, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है. हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भाव से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है.

आज के दिन भक्त अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और सफलता की कामना करते हैं और बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं.

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