31 January 2025 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है. ज्योतिष हिंदू पंचांग से रोजाना शुभ अशुभ मुहूर्त राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं. आइए काशी के ज्योतिष से जानते हैं 31 जनवरी, दिन शुक्रवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के बारे में…
| तिथि | त्रयोदशी | 08:25 तक |
| नक्षत्र | पुनर्वसु | 25:33 तक |
| प्रथम करण | तैतिल | 08:25 तक |
| द्वितीय करण | गर | 19:07 तक |
| पक्ष | शुक्ल | |
| वार | शनिवार | |
| योग | विष्कुम्भ | 13:32 तक |
| सूर्योदय | 07:10 | |
| सूर्यास्त | 17:58 | |
| चंद्रमा | कर्क | |
| राहुकाल | 09:52-11:13 | |
| विक्रमी संवत् | 2082 | |
| शक संवत | 1947 | विश्वावसु |
| मास | माघ | |
| शुभ मुहूर्त | अभिजीत | 12:13-12:56 |
आज का पंचांग
31 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी. इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का विशेष संयोग बन रहा है. शनिवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:56 बजे तक रहेगा. वहीं राहुकाल सुबह 09:52 से 11:13 बजे तक माना जाएगा. इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे.
पंचांग के पांच अंग
तिथि
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार जब चंद्र रेखांक, सूर्य रेखांक से 12 अंश आगे बढ़ता है, उस अवधि को तिथि कहा जाता है. एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जिन्हें दो भागों—शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष—में बांटा गया है. शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है, जबकि कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है.
तिथि के नाम- प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा.
नक्षत्र: आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है. कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिन पर नौ ग्रहों का स्वामित्व माना गया है. ये नक्षत्र क्रमवार इस प्रकार हैं— अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र.
वार: वार का आशय दिन से है. एक सप्ताह में सात वार होते हैं. ये सात वार ग्रहों के नाम से रखे गए हैं – सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार.
योग: नक्षत्र की भांति योग भी 27 प्रकार के होते हैं. सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है. दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम – विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति.
करण: एक तिथि में दो करण होते हैं—एक तिथि के पूर्वार्ध में और दूसरा उत्तरार्ध में. कुल मिलाकर 11 करण माने गए हैं. इनके नाम हैं—बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न. इनमें विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

