Karwa Chauth 2026: हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना से रखती हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का समापन माना जाता है. इस दिन माता करवा, भगवान गणेश, माता पार्वती और शिवजी की पूजा करने का विधान माना जाता है.
बता दें कि करवा चौथ व्रत और पूजा में करवा, छलनी सहित कई चीजों का होना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. कुछ विशेष चीजों के बिना करवा चौथ की थाली और पूजा अधूरी रह सकती है. ऐसे में सुबह से लेकर शाम तक की पूजा में कुछ कमी न रह जाए, इसके लिए यहां देखें करवा चौथ व्रत और पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट….
करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट
करवा चौथ के दिन शाम की पूजा के लिए कुछ चीजों को होना अत्यंत आवश्यक होता है। ऐसे में करवा चौथ से पहले ही इन चीजों को घर लाकर एक स्थान पर जरूर रख लें ताकि आपकी पूजा में कोई छोटी-सी कमी भी न रह जाए।
- पूजा के लिए भगवान गणेश, शिवजी और माता पार्वती की प्रतिमा
- लकड़ी की चौकी
- करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान शिव के नए वस्त्र व चुनरी
- मिट्टी का करवा ढक्कन सहित और थाली
- सोलह श्रृंगार की सामग्री, दीपक, गाय का शुद्ध घी और रूई की बाती
- चांद देखने के छलनी और कलश
- कपूर, अगरबत्ती, अक्षत, हल्दी, चंदन, फूल, रोली, कुमकुम और पान का पत्ता
- गेहूं, लहुआ, कच्चा दूध, दही, शहद, पिसी हुई शक्कर या बूरा और मिठाई
- मौली या कलावा, गिलास अथवा लोटा, करवा चौथ व्रत कथा की बुक और दक्षिणा के लिए कुछ पैसे
करवा चौथ की थाली में क्या-क्या रखें?
हिंदू धर्म में करवा चौथ की थाली का बहुत विशेष महत्व बताया गया है। कुछ चीजों को शामिल किए बिना यह थाली अधूरी रह सकती है। ऐसे में अपनी थाली को सजाने के लिए उसमें दीपक, छलनी, करवा, पानी का लोटा, दीपक, कांस की सींकें, मिट्टी की 5 डेलियां, सिंदूर और मिठाई जरूर शामिल करें।
करवा चौथ पूजा में करवा, छलनी, सींक और दीपक क्यों है जरूरी?
- छलनी : करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं छलनी से पति का चेहरा देखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं. साथ ही, चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. छलनी को लेकर ऐसी मान्यता भी है कि इसमें हजारों छेद होते हैं और छलनी से देखने पर हर छेद से चांद के जो प्रतिबिंब दिखाई पड़ते हैं उतनी ही अधिक पति आयु लंबी होती है. इसलिए करवा चौथ पूजा की सामग्री में छलनी को जरूर शामिल करना चाहिए.
- करवा : मान्यता है कि करवा भगवान गणेश का प्रतीक होता है. वहीं, यह भी मान्यता है कि करवे में लगी टोटी गणेशजी के सूंड समान होती है. इसी से चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण होता है. साथ ही, करवा को उस नदी का प्रतीक माना जाता है जिसमें मां करवा के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था.
- सींक : पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मगरमच्छ ने करवा के पति का पैर पकड़ लिया था। उस समय इन सींकों की शक्ति से ही उन्होंने अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी. ऐसे में करवा चौथ के दिन कांस की सींक को करवे की टोटी में डालकर रखने का विधान होता है.
- दीपक : करवा चौथ के दिन चंद्रोदय होने के बाद छलनी में दीपक रखकर पति का मुख देखने का विधान होता है. मान्यता है कि इसका उजाला पति-पत्नी के रिश्ते के अंधकार का दूर करके उसमें प्रेम की नई रोशनी भर दे. इसी कामना के साथ यह विधि पूरी की जाती है.

