Astrology: कुंडली के इन 4 भावों में केतु देता है शुभ फल, धन, करियर और सम्मान में होती है वृद्धि

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Ketu in Kundli: वैदिक ज्योतिष में केतु को छाया ग्रह माना जाता है. आमतौर पर इसे एक क्रूर ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन हर स्थिति में केतु अशुभ परिणाम ही दे, ऐसा जरूरी नहीं है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के कुछ विशेष भावों में केतु की उपस्थिति व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव, करियर में सफलता, धन लाभ और आध्यात्मिक उन्नति का कारण बन सकती है. मान्यता है कि केतु जहां एक ओर व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से दूर ले जाता है, वहीं दूसरी ओर सही स्थान पर होने पर उसे समाज में प्रतिष्ठा, ज्ञान और विशेष उपलब्धियां भी दिला सकता है. आइए जानते हैं कुंडली के उन 4 भावों के बारे में, जहां केतु का बैठना शुभ माना जाता है.

तृतीय भाव में केतु

ज्योतिष में तृतीय भाव को साहस, पराक्रम, संचार और प्रयासों का भाव माना जाता है. इस भाव में केतु की स्थिति काफी शुभ मानी जाती है. जिन लोगों की कुंडली के तीसरे भाव में केतु होता है, वे निडर, आत्मविश्वासी और मेहनती स्वभाव के माने जाते हैं. ऐसे लोग अपने दम पर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी जोखिम लेने से नहीं घबराते. मान्यता है कि तृतीय भाव में स्थित केतु व्यक्ति को समाज में पहचान दिलाने के साथ-साथ करियर में ऊंचे पद तक पहुंचाने में भी मदद कर सकता है.

षष्ठम भाव में केतु

कुंडली का छठा भाव शत्रु, रोग और संघर्ष से जुड़ा माना जाता है. इस भाव में केतु की उपस्थिति व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान कर सकती है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसे लोग अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त करने में सक्षम होते हैं. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास बना रहता है. इसके अलावा करियर और सामाजिक जीवन में भी ऐसे लोग अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. छठे भाव का केतु व्यक्ति को संघर्षों से लड़कर सफलता हासिल करने की क्षमता देता है.

अष्टम भाव में केतु

अष्टम भाव को रहस्य, शोध, गूढ़ ज्ञान और अचानक मिलने वाले लाभ का भाव माना जाता है. इस भाव में केतु की स्थिति व्यक्ति को गहरी सोच और शोधपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है. ऐसे लोगों की रुचि विज्ञान, ज्योतिष, अध्यात्म, तंत्र-मंत्र और रहस्यमयी विषयों में हो सकती है. कई बार ये लोग रिसर्च और खोज से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अष्टम भाव में स्थित केतु पैतृक संपत्ति से लाभ और जीवन में अचानक धन प्राप्ति के योग भी बना सकता है. नौकरी और व्यापार में भी ऐसे लोग सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

द्वादश भाव में केतु

कुंडली का बारहवां भाव मोक्ष, विदेश यात्रा, आध्यात्मिकता और खर्च से संबंधित माना जाता है. इस भाव में केतु की स्थिति व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बना सकती है. ऐसे लोग धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में अधिक रुचि रखते हैं. इनके अंदर दूरदर्शिता और गहरी अंतर्ज्ञान शक्ति देखने को मिल सकती है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार विदेश से जुड़े कार्य, विदेशी कारोबार या विदेश में नौकरी करने पर ऐसे लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है. अपने ज्ञान और अनुभव के बल पर वे समाज में अलग पहचान भी बना सकते हैं.

नवम भाव में भी मिल सकते हैं शुभ परिणाम

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि केतु मित्र राशि में स्थित हो या नवम भाव में विराजमान हो, तो भी व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. ऐसे लोगों को भाग्य का सहयोग मिलने के साथ धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष प्रगति प्राप्त हो सकती है.

केतु की स्थिति का प्रभाव क्यों है महत्वपूर्ण?

वैदिक ज्योतिष में किसी भी ग्रह का फल केवल उसके भाव से ही नहीं, बल्कि उसकी राशि, दृष्टि, युति और पूरी कुंडली की स्थिति पर भी निर्भर करता है. इसलिए केतु के शुभ या अशुभ प्रभाव का सटीक आकलन जन्म कुंडली के संपूर्ण विश्लेषण के बाद ही किया जा सकता है. फिर भी ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार तृतीय, षष्ठम, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित केतु व्यक्ति को साहस, सफलता, सम्मान, धन लाभ और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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