महामृत्युंजय मंत्र की आराधना से नंदी ने पाया भगवान शिव का आशीर्वाद: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीशिवमहापुराण शतरूद्र संहिता में भगवान शिव के अवतारों की कथा है। भगवान शंकर के अनन्त अवतार हुए हैं। उनके अवतारों की गिनती कर पाना असम्भव है। हर द्वापर में भगवान व्यास के रूप में अवतार लेकर वेद का प्रचार करते हैं।
श्रीशिवमहापुराण में वैवस्वत मन्वन्तर के अट्ठाईस चतुर्युगी का वर्णन है। हर द्वापर में भगवान व्यास के रूप में अवतार लेते हैं। इस तरह श्रीशिवमहापुराण में अट्ठाईस  व्यास का वर्णन है। प्रारम्भ में नंदीश्वर अवतार का वर्णन है। भारत के हिमाचल प्रान्त में शिलाद नाम के ऋषि रहते थे। शिलाद महर्षि ने भगवान शंकर की आराधना किया और भगवान से अयोनिज और मृत्यु से रहित पुत्र की कामना किया।
जिससे शिलाद महर्षि के यहां भगवानशिव नंदीश्वर के रूप में अवतार लिये। एक बार मित्रावरुण नाम के ऋषि ने शिलाद महर्षि से कहा- इस बालक की आयु केवल पांच वर्ष है। शिलाद महर्षि दुःखी रहने लगे। भगवान नंदी ने अपने पिता से कहा जिसके माता-पिता दुःखी रहते हों ऐसे पुत्र को धिक्कार है। आप अपने दुःख का कारण बताइये।शिलाद महर्षि ने मित्रावरुण वाली बात बताया।
 नंदी भगवान ने कहा हमें हमारे गुरु नारद जी से महामृत्युंजय मंत्र प्राप्त हुआ है। जिसका जप करने से व्यक्ति मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है। भगवान नंदीश्वर ने महामृत्युंजय मंत्र की आराधना किया, भगवान शिव ने उनको प्रकट हो करके दर्शन दिया। नंदी भगवान ने वरदान मांगा कि आप कहीं भी पधारे तो मुझे वाहन के रूप में स्वीकार करें। जब हम लोग शिवालय जाते हैं तो वहां पहले भगवान नंदी का दर्शन होता है और द्वार पर कच्छप का दर्शन होता है।
 नंदी धर्म के प्रतीक हैं और कछुआ इंद्रिय संयम का प्रतीक है। शिव मंदिर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से भगवान शिव मानो दो शिक्षा देते हैं कि- आपके जीवन में धर्म होना चाहिए और आपके जीवन में इन्द्रिय संयम होना चाहिए। अगर शिव की यह शिक्षा हम अपने जीवन में धारण करें, हमारा जीवन धन्य होगा।
शिवजी की अवतारों में सद्योजातावतावतार, वामदेवावतार, तत्पुरुषावतार, घोरावतार, इतीशानावतार। इसके आगे चलकर अष्टमूर्ति वर्णन, अर्धनारीश्वर अवतार, भैरव, शरभ अवतार,गृहपति अवतार  , शिव का दशावतार, एकादश अवतार, दुर्वासावतार। इसके बाद भगवान व्यास ने हनुमद् अवतार बताया है। श्री हनुमान जी के रूप में भगवान शिव ने अवतार लिया। जिनका चरित शिवमहापुराण में बहुत विशाल रूप से है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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