Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रकाश धीरे-धीरे होता है जबकि अंधेरा तत्काल हो जाता है। सुबह में सूर्य भगवान् पूर्व दिशा में उगते हैं। प्रकाश तो केवल पूर्व दिशा से आता है लेकिन अंधकार दसों...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, राजनीति और धर्म को आप अलग नहीं कर सकते। राजनीति बुरी नहीं है। राजनीति तो जीवन का एक अनिवार्य अंग है। राजनीति में तो धर्म होना चाहिए लेकिन धर्म में...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, चार चीजों का सेवन सदा करना चाहिए- सत्संग, संतोष, दान और दया, गोधन गज धन वाजि धन, और रतन धन खान। जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान।।
चार अवस्थाओं में आदमी...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्येक साधक के जीवन में छः बातों का निर्णय होना बहुत जरूरी है।
1- संत ÷ प्रत्येक साधक के जीवन में संत का आश्रय हो जो उसका मार्गदर्शन करे। संत, जिसके...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, एक पढ़े-लिखे बाबू नाव द्वारा नदी पार कर रहे थे। उन्होंने नाविक से पूँछा- क्या तुम व्याकरण जानते हो? नाविक ने उत्तर दिया, नहीं। बाबू ने कहा- तुम्हारी चार आने...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्नेह:- बड़ा छोटे पर जो भाव रखता है उसे स्नेह कहते हैं। जैसे मां बेटे पर करती है उसे स्नेह या वात्सल्य कहते हैं। पिता अपने पुत्र पर स्नेह करता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान नारायण के चौबीस अवतारों में तीन तरह के अवतार बताये गये हैं, अंशावतार, कलावतार और पूर्णावतार।अंशावतार को ही आवेशावतार भी कहते हैं। भगवान अंशावतार ले करके दुष्टों का संहार और...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान् श्री कृष्ण का प्राकट्य भाद्रमास, कृष्णपक्ष, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार आधी रात को हुआ। भगवान का प्राकट्य कंस के कारागार में हुआ। इसका आध्यात्मिक पक्ष यह है कि...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...