परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सात कोस का पहाड़ उठाकर बृजवासियों की रक्षा की. उन्होंने कहा कि जब भक्त कहता है ‘कन्हैया मेरा है, कन्हैया मेरे प्राण हैं’, तो ईश्वर ऐसी बातें सुनकर बड़े प्रसन्न होते हैं.
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, रात्रि का पूर्ण अन्धकार है, बेड़ियां, हथकड़ियां लगी हुई थी। हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे रहा था। देवकी जी वासुदेव से कहती हैं, हमें भी कभी इन बेड़ियों,...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रेमाभक्ति के अंतरिक्ष का उज्जवलतम सितारा ध्रुव आज भी अपनी भक्ति की आभा से सबसे चमकीले सितारे के रूप में अन्तरिक्ष की शोभा बढ़ा रहा है। ध्रुव के पिता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अब यह देखो कि आप ध्यान करते समय अकेले रहते हो या ध्यान करते समय भी घर का चिन्तन होता रहता है। अगर ध्यान, भजन, नाम जपते समय भी...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्री शुकदेव भगवान् ने विगलित अण्डे के रूप में जैसे ही भागवत कथा रूपी अमृत का छींटा प्राप्त किया, उनके अन्दर प्राणों का संचार हुआ और वे पार्वती अम्बा...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सुदामा चरित में भगवान श्रीकृष्ण ने मित्र का धर्म बताया। अपने बड़े से बड़े दुःख की परवाह न करके मित्र के छोटे से दुःख का निराकरण हो ऐसा प्रयास...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, एक बार भगवान् श्रीकृष्ण भोजन कर रहे थे, वहां पर एक कीड़े को देखकर भगवान् हंस पड़े, रुक्मिणी ने कारण पूछा, प्रभु ने बताया कि यह ७२ बार देवताओं...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, गोवर्धन पूजा से पहले ब्रज में देवराज इन्द्र की पूजा होती थी। देवराज इन्द्र का यज्ञ होता था। उसे इन्द्र यज्ञ कहते थे। इन्द्र को अभिमान हो चुका था...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य हुआ तब रात्रि १२ बजे का समय, दिशाएं निर्मल, शीतल मंद सुगन्ध पवन चलने लगी, हर वृक्ष पर पुष्प निकल आये, भौंरे गूंजने लगे।...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भक्त्या तुष्यति केवलम्। भगवान केवल शिष्टाचार देखते तो ब्याध के ऊपर भगवान की कृपा कभी न होती। श्री शिव पुराण में व्याध की कथा है। उसको जंगल में शिव...