Divya morari bapu

सन्त ही सर्वेश्वर के स्वरूप की करते हैं पहचान: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला गुरुपूर्णिमा पर्व का इतिहास प्राचीनकाल से जुड़ा है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। सनातन धर्म में वेदों के संकलनकर्ता और १८ पुराणों के...

भगवान श्रीकृष्ण ने एक मुट्ठी तन्दुल खाकर सुदामा के सारे कष्ट को कर दिया समाप्त: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्री सुदामा जी भगवान् श्रीकृष्ण के बाल सखा थे। उन्होंने अवंतिका पुरी में संदीपनी मुनि के आश्रम पर भगवान के साथ गुरुकुल में विद्या अध्ययन किया था। भगवान श्रीकृष्ण विद्याध्ययन करके मथुरा वापस...

जो विष पीने को तैयार है वही कर सकता है ईश्वर की प्राप्ति: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, रासलीला, कंस का उद्धार, श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा का गान किया गया आध्यात्मिक दृष्टि से रास शब्द का अर्थ होता है," रसानां समूहः रासः " रस आनन्द को कहते हैं। कई बार...

नंदोत्सव के अठारह मंत्रों के पाठ से भागवत श्रवण करने का प्राप्त होता है पुण्य: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नंदोत्सव का वर्णन, पूतना, शकटासुर और तृणावर्त का उद्धार। नामकरण संस्कार, भगवान की अनेक बाल लीला, माखन चोरी, मृदभक्षण लीला, दामोदर लीला का गान किया गया। वृन्दावन लीला में, वकासुर वत्सासुर,...

प्रभु श्री राम के चरित्र के द्वारा हुई समाज में मर्यादा की स्थापना: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, दो वंश इस संसार में बड़े महिमामण्डित हुए, पहला सूर्यवंश जिसमें भगवान राम का अवतार हुआ। प्रभु श्री राम ने अपने मंगलमय चरित्र से समाज में मर्यादा का स्थापना...

ईश्वर को पाने का मार्ग है भक्ति: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, विदुर चरित, ध्रुव चरित, प्रहलाद चरित और वामन अवतार की कथा का गान किया गया। विदुर चरित में वर्णन आता है कि श्री विदुर जी महाराज ने श्री गंगा...

श्रीमद्भागवत के 24 अवतारों का स्मरण दिलाता है दुखों से मुक्ति: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रारम्भ में शौनकादि ऋषियों  द्वारा छः प्रश्न किये गये।जिसके उत्तर में श्रीशुकदेवजी ने सम्पूर्ण भागवत सुना दिया। भगवान नारायण के चौबीस अवतारों की कथा ही श्रीमद्भागवत महापुराण...

भागवत कथा श्रवण करने से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की होती है प्राप्ति: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सत्संग के बिना न तो विवेक जागृत होता है और न स्वदोष का भान ही होता है। जब तक हमें अपने दोषों का पता नहीं लगेगा, तब तक हम उससे छुटकारा...

सातों दिन व्रत रखने से नहीं, क्रोध छोड़ने से मिलता है प्रभु का आशीर्वाद- दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, शरीर का ही नहीं, आत्मा का उपवास प्रभु के पास पहुंचाता है। मन से प्रभु के स्मरण में, उनके चरणों में रहना ही सच्चा उपवास है। उपवास शब्द का अर्थ होता...

कर्मों के अनुसार ही व्यक्ति का होता है जन्म: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवत महापुराण में गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि- सब कुछ कर्मों के आधीन है। कर्मों के अनुसार ही व्यक्ति का जन्म होता है और कर्मों...
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