भगवद् भाव से ही पवित्र बनते हैं सारे सम्बन्ध: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सत्संग से युक्त होकर सद्भाव पूर्वक सेवा करके घर के लोगों को प्रसन्न रखो, किन्तु घर में आसक्त मत रहो। घर के सभी कार्य करते हुए भी चित्त को प्रभु के चरणों में समर्पित रखो। आत्मदृष्टि रखोगे तो प्रेम प्रकट होगा जो प्रभु के पास पहुँचाने में सहायक बनेगा।
 
परन्तु यदि देहदृष्टि रखोगे तो मायाजाल में उलझ जाओगे और फिर प्रभु का मिलना तो असम्भव ही होगा। संसार के सारे सम्बन्ध खूब पवित्र हैं। यदि भगवद्  भाव रखा जाय। एक दूसरे की उन्नति करते हुए भगवद् आराधना की जाय तो जीवन सफल होता है। भक्ति के माध्यम से जिसमें सच्ची पात्रता आ जाती है, उसे प्रभु स्वयं ही अपने पास बुला लेते हैं।
 
जिसके मन में पुत्र होने पर भी आनन्द, न होने पर भी आनन्द उसका नाम भक्त है। साधना करने वालों के लिए संतों की चेतावनी, आज तक जो आपका नहीं हो सका, वह अब भविष्य में भी होने वाला नहीं है। ऐसे जगत को भूल जाना है। और परमात्मा का सतत चिंतन करना है। परमात्मा पहले भी अपने थे आज भी अपने हैं और आगे भी अपने रहेंगे। वही सच्चे अपने हैं।
 
पुत्र-पुत्रियों का मोह नहीं करना चाहिए। विवेक रूपी सन्तान ही सद्गति प्रदान करती है। जो दूसरों को सुखी करता है, वही सुखी हो सकता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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