Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप " मां कुष्मांडा" की पूजा की जाती है। जब सृष्टि में चारों ओर केवल अंधकार था तब इन्होंने अपनी मुस्कान मंद...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के बाद, आता है तीसरा दिन। तीसरा दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चन्द्रघण्टा को समर्पित है।माँ...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नवरात्रि की शुरुआत होती है माँ शैलपुत्री की पूजा से,दूसरे दिन आता है माँ दुर्गा का वह स्वरूप जो तप और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है।ये स्वरूप है...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा,पितर का मतलब केवल हमारे जो पूर्वज हैं, वही पितर नहीं है।अनन्त लोकों में एक पितृलोक है। पितृलोक में रहने वाले जो दिव्य पितृ होते हैं।वह दिव्य पितृ स्वयं भगवान है-...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, पितृपक्ष पितरों का पर्व है। पितरों का महोत्सव है। वर्ष में एक बार सोलह दिन का पितरों का महोत्सव होता है। ऐसे तो पन्द्रह दिन का ही पक्ष होता है,...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्राद्ध भी कई प्रकार का होता है। जिस तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु होती है, वह मुख्य तिथि वर्ष में जब एक बार आती है, उस तिथि को उसके लिए...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा,पितरों का महापर्व ग्यारहवां दिवस- पितृपक्ष की इंदिरा एकादशी व्रत÷ इन्दिरा एकादशी व्रत यमलोक,पितृलोक और अधोगति में पड़े पितरों का उद्धार करने वाला है।इन्दिरा एकादशी व्रत जो भक्तजन श्रद्धापूर्वक करते हैं।वो...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रथम श्रेणी के पितर होते हैं, जिनका नाम सोमपीथी है। द्वितीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका नाम होता है बर्हिखद और जो तृतीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ये सनातन परम्परा है, पितरों के लिये गया में श्राद्ध करने के पूर्व बड़े पूजा पाठ के साथ यात्रा करते हैं। तब गया श्राद्ध की यात्रा पर जाते हैं। गया...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अपात्रक श्राद्ध जो होता है, वह श्राद्ध व्यर्थ हो जाता है। अपात्रक श्राद्ध क्या है? श्राद्ध सपात्रक होना चाहिए। सपात्रक श्राद्ध का अर्थ होता है। श्राद्ध का जो मुख्य नियम...