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भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग है प्रेम: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्नेह:- बड़ा छोटे पर जो भाव रखता है उसे स्नेह कहते हैं। जैसे मां बेटे पर करती है उसे स्नेह या वात्सल्य कहते हैं। पिता अपने पुत्र पर स्नेह करता...

श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतारों में दिखती है अद्भुत समानता: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान नारायण के चौबीस अवतारों में तीन तरह के अवतार बताये गये हैं, अंशावतार, कलावतार और पूर्णावतार।अंशावतार को ही आवेशावतार भी कहते हैं। भगवान अंशावतार ले करके दुष्टों का संहार और...

जन्म से नहीं कर्म और ज्ञान से मिटता है जीवन का अंधकार: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान् श्री कृष्ण का प्राकट्य भाद्रमास, कृष्णपक्ष, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार आधी रात को हुआ। भगवान का प्राकट्य कंस के कारागार में हुआ। इसका आध्यात्मिक पक्ष यह है कि...

अच्छे कर्म ही जीवन को बनाते हैं सुखी और सार्थक: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...

अच्छे कर्मों से संवरता है जीवन: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...

आत्मचिंतन ही जीवन को सही दिशा देने का मार्ग: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जो साधक प्रतिदिन अपने कर्तव्यों की समीक्षा नहीं करता उसके जीवन में जड़ता का कीचड़ जमा हो जाता है। विचारों में रूढ़ता और आग्रह इस कदर हावी हो जाता है...

मन के बिना नहीं हो सकता सांसारिक कार्यों का निर्वाह: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा,  हम सबके जीवन के सारे कार्यकलाप मन के द्वारा ही प्रेरित, संचालित और निष्पादित होते हैं। मन के बिना हम कुछ नहीं कर सकते।अगर हम संसार में हैं तो मन...

स्वाध्याय एवं सत्संग से ही सुधरता है स्वभाव: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्वभाव को सुधारो! नम्रता और नाम-स्मरण से स्वभाव सुधरता है। स्वाध्याय जीवन में आवश्यक है। हमारे-आपके जीवन में तीन आध्यात्मिक साधन अति आवश्यक हैं- नाम स्मरण, स्वाध्याय एवं सत्संग। प्रभु...

धर्म और भक्ति से ही होगा समाज का कल्याण: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, उत्सव प्रसाद में तन्मय होने के लिए नहीं, प्रभु में तन्मय होने के लिए है। जब भारत पर विदेशी आक्रांताओं का शासन था, उस काल में धर्म पर बहुत बड़ा...

सद्भावपूर्ण सेवा से प्राप्त होता है आशीर्वाद: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अन्तर के आशीर्वाद मांगने से नहीं, सेवा करने से मिलते हैं। स्वयं का यश दूसरों को देने वाला ही सबके आशीर्वाद प्राप्त करता है, जो सेवा द्वारा सबके आशीर्वाद प्राप्त करता है,...
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