जिसका हृदय विशाल और नयन स्नेहिल हो, उसे ही प्रभु की कृपा होती है प्राप्त: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान श्रीगणेशजी विवेक प्रदान करने वाले देव हैं। मनुष्य के जीवन में विवेक अति आवश्यक है। विवेक भगवान गणेश की आराधना से स्वतः प्रगट होता है। यौवन हमेशा रहने वाला नहीं है। मनुष्य के मरने के बाद उसकी आत्मा की शान्ति के लिए घर के व्यक्ति भागवत सप्ताह का पारायण कराते हैं।
घर के इन व्यक्तियों की भावना तो अच्छी है, परन्तु यदि मरने वाले का जीवन बुरे कामों में ही बीता हो तो इस सप्ताह का कोई विशेष महत्व नहीं है।वास्तव में तो मनुष्य का जीवन-सप्ताह अर्थात् जीवन का एक-एक दिन भागवत परायणता में बीतना चाहिए।
जीवन यदि इस तरह बीता हो तो मरने के बाद भागवत पारायण का सप्ताह बिठाने की कोई आवश्यकता नहीं। अतः चलो, हम अपने जीवन के सप्ताह को भगवद् कार्य और भगवद् स्मरण में ओत-प्रोत होकर भगवद्मय बनायें, जिससे अपनी मृत्यु के बाद भागवत सप्ताह की आवश्यकता ही न रहे।
यह घर तुम्हारा नहीं, बल्कि प्रभु का प्रेम मंदिर है- इस भावना से इसमें निवास करो। मनुष्य मालिक नहीं प्रभु का मुनीम है। जो मनुष्य हिसाब में घोटाला करता है, उसी को घबराहट होती है।आप जो कुछ काम में लेते हो या जिसके द्वारा जीवित रहते हो, वह सब परमात्मा का है।
जिसका हृदय विशाल और नयन स्नेहिल हो, उसे ही प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। जो प्रभु के सम्मुख ले जाता है, वह परमात्मा से भी श्रेष्ठ गिना जाता है।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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