Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्येक साधक के जीवन में छः बातों का निर्णय होना बहुत जरूरी है।
1- संत ÷ प्रत्येक साधक के जीवन में संत का आश्रय हो जो उसका मार्गदर्शन करे। संत, जिसके...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, एक पढ़े-लिखे बाबू नाव द्वारा नदी पार कर रहे थे। उन्होंने नाविक से पूँछा- क्या तुम व्याकरण जानते हो? नाविक ने उत्तर दिया, नहीं। बाबू ने कहा- तुम्हारी चार आने...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्नेह:- बड़ा छोटे पर जो भाव रखता है उसे स्नेह कहते हैं। जैसे मां बेटे पर करती है उसे स्नेह या वात्सल्य कहते हैं। पिता अपने पुत्र पर स्नेह करता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान नारायण के चौबीस अवतारों में तीन तरह के अवतार बताये गये हैं, अंशावतार, कलावतार और पूर्णावतार।अंशावतार को ही आवेशावतार भी कहते हैं। भगवान अंशावतार ले करके दुष्टों का संहार और...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान् श्री कृष्ण का प्राकट्य भाद्रमास, कृष्णपक्ष, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार आधी रात को हुआ। भगवान का प्राकट्य कंस के कारागार में हुआ। इसका आध्यात्मिक पक्ष यह है कि...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें जीवन में कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ता है क्योंकि कर्म किये बिना हम सब एक क्षण भी नहीं रह सकते। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जो साधक प्रतिदिन अपने कर्तव्यों की समीक्षा नहीं करता उसके जीवन में जड़ता का कीचड़ जमा हो जाता है। विचारों में रूढ़ता और आग्रह इस कदर हावी हो जाता है...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हम सबके जीवन के सारे कार्यकलाप मन के द्वारा ही प्रेरित, संचालित और निष्पादित होते हैं। मन के बिना हम कुछ नहीं कर सकते।अगर हम संसार में हैं तो मन...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्वभाव को सुधारो! नम्रता और नाम-स्मरण से स्वभाव सुधरता है। स्वाध्याय जीवन में आवश्यक है। हमारे-आपके जीवन में तीन आध्यात्मिक साधन अति आवश्यक हैं- नाम स्मरण, स्वाध्याय एवं सत्संग। प्रभु...
भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण, स्मरण और दान-पुण्य किया जाता है. जानिए 7 स्टेप में तर्पण की विधि.