Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा,पितर का मतलब केवल हमारे जो पूर्वज हैं, वही पितर नहीं है।अनन्त लोकों में एक पितृलोक है। पितृलोक में रहने वाले जो दिव्य पितृ होते हैं।वह दिव्य पितृ स्वयं भगवान है-...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, पितृपक्ष पितरों का पर्व है। पितरों का महोत्सव है। वर्ष में एक बार सोलह दिन का पितरों का महोत्सव होता है। ऐसे तो पन्द्रह दिन का ही पक्ष होता है,...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्राद्ध भी कई प्रकार का होता है। जिस तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु होती है, वह मुख्य तिथि वर्ष में जब एक बार आती है, उस तिथि को उसके लिए...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा,पितरों का महापर्व ग्यारहवां दिवस- पितृपक्ष की इंदिरा एकादशी व्रत÷ इन्दिरा एकादशी व्रत यमलोक,पितृलोक और अधोगति में पड़े पितरों का उद्धार करने वाला है।इन्दिरा एकादशी व्रत जो भक्तजन श्रद्धापूर्वक करते हैं।वो...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रथम श्रेणी के पितर होते हैं, जिनका नाम सोमपीथी है। द्वितीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका नाम होता है बर्हिखद और जो तृतीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ये सनातन परम्परा है, पितरों के लिये गया में श्राद्ध करने के पूर्व बड़े पूजा पाठ के साथ यात्रा करते हैं। तब गया श्राद्ध की यात्रा पर जाते हैं। गया...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अपात्रक श्राद्ध जो होता है, वह श्राद्ध व्यर्थ हो जाता है। अपात्रक श्राद्ध क्या है? श्राद्ध सपात्रक होना चाहिए। सपात्रक श्राद्ध का अर्थ होता है। श्राद्ध का जो मुख्य नियम...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्राद्ध में श्रद्धा और विश्वास के साथ पितरों के लिये जो कार्य किया जाय,वो मंगल कारक होता है।श्राद्ध में तीन सावधानी बहुत आवश्यक है। ये श्राद्धकर्म के लिये बहुत महत्वपूर्ण...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्राद्ध का बहुत बड़ा महत्व है। भगवान राम ने स्वयं श्राद्ध किया। इसलिए हमारे आचार्यों ने कहा- ' रामादि वत वर्तितव्यं' ये नहीं कहा अन्य के समान आचरण करो। कहा...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आश्विनमास का पितृपक्ष,ये पितरों का महापर्व चल रहा है। इस काल में लोग पितरों की संतुष्टि के लिये पिण्डदानादि,श्राद्धादि कर्म करते हैं। वेद का वचन है- देव पितृ कार्याभ्यां मा प्रमदितव्यं।'
देवता...