Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मानो, हम मरने वाले नहीं हैं ! हमें अपने घर के आंगन में होने वाले किसी के विवाह की तैयारियां महीनों पहले करनी पड़ती है। कहीं बाहर प्रवास के लिए...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, शिवजी त्याग रूप हैं और श्रीकृष्ण प्रेम स्वरूप है। भगवान शंकर ने विश्व के लिए सर्वस्व त्याग किया और दुनियां को जिसकी आवश्यकता नहीं, उस हलाहल विष और धतूरे...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आनंद किसी बाहरी वस्तु में नहीं है। वह तो आपके भीतर बैठा है। बाहर की वस्तु में आनंद ढूंढ़ोगे तो वेदना की भट्टी में गिरोगे। क्योंकि आप जिस वस्तु...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, संतों की मृत्यु मंगलमय होती है। उनकी पुण्य-तिथि ही मनाई जाती है, जन्मदिवस नहीं। श्रीराम और श्रीकृष्ण की जन्म-जयन्ती मनाई जाती है, किन्तु संतों का तो मृत्यु-महोत्सव ही मनाया...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, दान, यज्ञ या कोई भी सत्कर्म करो, पर साथ-साथ प्रभु का नाम स्मरण भी करते रहो। स्मरण के बिना किया गया सत्कर्म अभिमान पैदा करेगा और की गई सारी मेहनत...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवतमहापुराण में पुरंजन की कथा आती है।पुरंजन का अविज्ञात नामक एक मित्र था। वह हमेशा उसकी गुप्त रूप से मदद करता था। यह पुरंजन अर्थात् जीवात्मा और अविज्ञात अर्थात्...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, कथा सुनने के बाद जीवन में परिवर्तन होना चाहिए। यह शरीर मेरा नहीं तो फिर यह धन मेरा कैसे हो सकता है? अधिकतर लोग दुःखी हैं, क्योंकि लोग भगवान...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मैं तुच्छ नहीं हूँ। मैं तो शुद्ध चैतन्यमय परमात्मा का अंश हूँ। मन की मजबूती के लिए बड़ी औषधि मंत्र जाप है। प्रभु पदार्थ से नहीं, प्रणाम से प्रसन्न...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिसके सिर पर भगवान के बजाय अभिमान बैठा है, वह बहुत ही दुःखी होता है। सांसारिक कार्य करते समय हम भगवान को न भूल जाएँ- इस बात का हमेशा ख्याल...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिसका जीवन सादा है, वही सच्चा साधु है। शरीर के मरने पर मुक्ति नहीं मिलती। मुक्ति तो मन की मृत्यु होने पर प्राप्त होती है। मन की मृत्यु ही...