जिसकी आंखें देह में रहते हुए देव को देख सकती हैं, वही कर सकता है परोपकार: दिव्य मोरारी बापू 

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, देव को लेकर ही देह की शोभा है। देह में से देव के चले जाने पर, जो लोग आइये-आइये कहकर बुलाते थे, वही लोग देह को घर से बाहर निकालकर जला देते हैं।
देह में बैठे देव के दर्शन करने हों तो देह को देव मंदिर मानो। शरीर तो एक कपड़ा है। आत्मा का आवरण है। महापुरुष उसे ज्यादा महत्व नहीं देते। महापुरुष तो किसी भी देह को देखते नहीं, वे तो उसमें रहने वाले देव को ही देखते हैं।
जिसकी आंखें देह में रहते हुए देव को देख सकती हैं, वही परोपकार कर सकता है। परोपकार परमात्मा की पूजा है। परोपकार करने वाले को सबमें परमात्मा दिखाई देते हैं। परमात्मा की पूजा केवल मंदिर में ही हो सकती है- ऐसी बात नहीं है। प्रभु की पूजा तो सबमें, रास्ता चलते समय भी हो सकती है।
रास्ता चलते समय जो कोई स्त्री या पुरुष दिखाई दे उसके कपड़े या देह को न देखो, परन्तु उसमें इष्टदेव विराजे हैं, ऐसा मानकर वन्दना करो। जो देह में देव को देख सकता है, वही देव की पूजा कर सकता है। जो केवल देह को देखा है, वह कभी परमात्मा की पूजा नहीं कर सकता। देह को बहुत महत्व नहीं देना चाहिए।
देह तो प्राण जाने के बाद केवल मिट्टी ही है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).
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