11 October 2026 Ka Panchang: 11 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. इस दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि रात 09:31 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी. चित्रा नक्षत्र रात 10:32 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद स्वाति नक्षत्र शुरू होगा.
वहीं, वैधृति योग रात 09:05 मिनट तक रहेगा. इस दिन चंद्रमा सुबह 10:03 मिनट तक कन्या राशि में रहेंगे, फिर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. रविवार को नवरात्रि के साथ चंद्र दर्शन और अग्रसेन जयंती भी मनाई जाएगी. ऐसे में आइए जानते हैं 11 अक्टूबर का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त और दिन के अन्य महत्वपूर्ण समय…
11 अक्टूबर 2026 का पंचांग
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दिन: रविवार
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: प्रतिपदा, रात 9:31 बजे तक; इसके बाद द्वितीया
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नक्षत्र: चित्रा, रात 10:32 बजे तक; इसके बाद स्वाति
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योग: वैधृति, रात 9:05 बजे तक; इसके बाद विष्कुम्भ
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करण: किस्तुघ्न, सुबह 9:22 बजे तक
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करण: बव, रात 9:31 बजे तक
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करण: बालव, रात 9:31 बजे के बाद
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विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थि
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शक संवत: 1948, पराभव
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पूर्णिमांत मास: आश्विन
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अमांत मास: आश्विन
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सूर्य राशि: कन्या
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चंद्र राशि: कन्या, सुबह 10:03 बजे तक; इसके बाद तुला
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ऋतु: शरद
11 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:38 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
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अमृत काल: दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:32 बजे तक
11 अक्टूबर 2026 को राहुकाल
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राहुकाल: शाम 4:34 बजे से 6:01 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:13 बजे से 1:40 बजे तक
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कुलिक काल: दोपहर 3:07 बजे से 4:34 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: शाम 4:28 बजे से 5:14 बजे तक
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वर्ज्य काल: सुबह 5:58 बजे से 7:37 बजे तक
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वर्ज्य काल: अगले दिन सुबह 4:26 बजे से 6:07 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
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सूर्योदय: सुबह 6:26 बजे
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सूर्यास्त: शाम 6:01 बजे
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चंद्रोदय: सुबह 6:47 बजे
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चंद्रास्त: शाम 6:19 बजे
11 अक्टूबर 2026 के पर्व और व्रत
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शारदीय नवरात्रि: आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि की शुरुआत होती है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है.
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चंद्र दर्शन: इस दिन चंद्र दर्शन का धार्मिक महत्व माना जाता है.
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अग्रसेन जयंती: इस अवसर पर महाराजा अग्रसेन के जीवन, आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है.
आनंदादि योग
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पद्म योग: रात 10:32 बजे तक
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लुम्ब योग: रात 10:32 बजे के बाद
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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