16 October 2026 Ka Panchang: 16 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार का दिन है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी. शारदीय नवरात्रि का छठा दिन होने के कारण मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी. शुक्रवार को रात 10 बजकर 6 मिनट तक शोभन योग रहेगा, जबकि मूल नक्षत्र शनिवार सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा. आइए जानते हैं 16 अक्टूबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय और षष्ठी पूजा का महत्व….
16 अक्टूबर 2026 का पंचांग
-
दिन: शुक्रवार.
-
तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि शनिवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट तक.
-
योग: शोभन योग शुक्रवार रात 10 बजकर 6 मिनट तक.
-
नक्षत्र: मूल नक्षत्र शनिवार सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक.
-
पर्व एवं विशेष: शारदीय नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा.
16 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
-
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 बजे से 5:44 बजे तक.
-
प्रातः संध्या: सुबह 5:19 बजे से 6:33 बजे तक.
-
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:47 बजे तक.
-
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:15 बजे से 6:40 बजे तक.
-
सायाह्न संध्या: शाम 6:15 बजे से 7:29 बजे तक.
16 अक्टूबर 2026 को किस शहर में कब रहेगा राहुकाल?
-
दिल्ली: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक.
-
मुंबई: सुबह 10:56 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक.
-
चंडीगढ़: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक.
-
लखनऊ: सुबह 10:26 बजे से 11:52 बजे तक.
-
भोपाल: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक.
-
कोलकाता: सुबह 9:55 बजे से 11:22 बजे तक.
-
अहमदाबाद: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक.
-
चेन्नई: सुबह 10:26 बजे से 11:54 बजे तक.
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय: सुबह 6:21 बजे.
- सूर्यास्त: शाम 5:50 बजे.
नवरात्रि का छठा दिन: मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
शारदीय नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा. इस दिन श्रद्धालु मां की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, साहस तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. मान्यता है कि मां कात्यायनी की उपासना से भय और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करके आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मकता की कामना करते हैं.
नवरात्रि की षष्ठी पूजा का क्या है महत्व?
बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में षष्ठी का विशेष महत्व है. इस दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है. इसे दुर्गा पूजा के मुख्य अनुष्ठानों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है. दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी स्वरूप वाली भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है. कई परंपराओं में इस प्रतिमा के साथ भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी विराजमान होती हैं. इस दौरान श्रद्धालु पूजा, आरती और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं.
नवरात्रि षष्ठी पूजा 2026: बिल्व निमंत्रण मुहूर्त
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 3:25 बजे.
- षष्ठी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:54 बजे.
- बिल्व निमंत्रण मुहूर्त: शाम 3:55 बजे से 6:15 बजे तक.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
यी भी पढ़े: मां चन्द्रघंटा की शक्ति से संचालित होता है संपूर्ण संसार: दिव्य मोरारी बापू

