Papankusha Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा आराधना के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. एकादशी तिथि हर माह में दो बार आती है. हर माह की पड़ने वाली एकादशी को अलग-अलग नाम से जानते हैं. वर्तमान में आश्विन माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है. आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापंकुशा एकादशी के नाम से जानते हैं. इस साल 22 अक्टूबर को एकादशी का व्रत रखा जाएगा. आइए जानते है व्रत कथा…
पापंकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर एक बहेलिया रहता था. वह बहुत ही क्रूर और हिंसक था. उसने अपने पूरे जीवन में लूट-पाट, हिंसा और गलत काम किए. जब बहेलिया का अंतिम समय आ गया, तो यमराज ने अपने दूतों से बहेलिया को लाने के लिए कहा. यमदूत ने बहेलिया को बताया कि उसका कल धरती पर अंतिम दिन है. आखिरी समय नजदीक आने पर वह बहुत डरा हुआ था. उसने अपने बुरे कर्मों का अनुमान लगाया कि अंतिम सांस के बाद उसे बुरे कर्मों की सजा भुगतनी पड़ेगी. बहेलिया को परेशान देख अंगिर ऋषि को उसपर दया आ गई.
एकादशी व्रत करने की सलाह दी
उसने अंगिर ऋषि को कहा कि बहेलिया होने की वजह से मैंने अपने जीवन के दौरान कई पशु-पक्षियों मारना पड़ा है. इसी वजह से मेरे द्वारा बहुत पाप हुए हैं. ऐसे में मुझे नर्क में जाना पड़ेगा. अंगिर ऋषि आप मुझे ऐसा कोई उपाय बताए जिससे मुझे सभी पापों से मुक्ति मिल जाए. अंगिर ऋषि ने आश्विन माह के शुक्ल की पापांकुशा एकादशी व्रत करने की सलाह दी. इसके बाद उसने विधिपूर्वक एकादशी व्रत किया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापांकुशा एकादशी व्रत को करने से बहेलिया को मोक्ष प्राप्त हुआ.
पापांकुशा एकादशी शुभ मुहूर्त
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट पर होगी. वहीं, तिथि का समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 47 मिनट पर होगा. उदायतिथि के अनुसार, आज 23 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत किया जा रहा है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

