घर हो या मंदिर, हर पूजा में क्यों बजती है घंटी? जानिए क्या है इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puja Bell Significance: पूजा की शुरुआत होते ही सबसे पहले घंटी की मधुर ध्वनि सुनाई देती है. यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती है. भारत के लगभग हर मंदिर और लाखों घरों के पूजा स्थलों पर घंटी बजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. कई लोग इसे देवी-देवताओं का आह्वान मानते हैं, तो कुछ इसे सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बताते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि धार्मिक मान्यताओं के साथ ही घंटी की ध्वनि को लेकर कई मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर भी चर्चा होती रही है. यही वजह है कि आज भी पूजा, आरती या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में घंटी बजाना एक अहम हिस्सा माना जाता है. ऐसे में यदि आपके मन में भी कभी यह सवाल आया है कि पूजा के समय घंटी क्यों बजाई जाती है, तो आइए विस्तार से जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में…

पूजा में घंटी बजाने की परंपरा?

हिंदू धर्म में घंटी को शुभता का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि पूजा शुरू करने से पहले घंटी बजाने से वातावरण पवित्र होता है और देवी-देवताओं का स्वागत होता है. घंटी की मधुर ध्वनि से आसपास की नकारात्मकता कम होती है और पूजा के लिए सकारात्मक माहौल बनता है. धार्मिक ग्रंथों में भी घंटी की ध्वनि को मंगलकारी बताया गया है. यही कारण है कि मंदिर में प्रवेश करते समय और आरती के दौरान घंटी बजाने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.

‘ॐ’ की ध्वनि से जुड़ी मान्यता

कई धार्मिक विद्वानों का मानना है कि घंटी की गूंज ‘ॐ’ के नाद जैसी अनुभूति कराती है. ‘ॐ’ को सृष्टि का मूल स्वर माना गया है. इसी वजह से घंटी की ध्वनि को आध्यात्मिक शांति और मन की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है.

वैज्ञानिक नजरिया

ध्यान केंद्रित करने में मिलती है मदद
विशेषज्ञों का मानना हैं कि किसी भी मधुर और स्पष्ट ध्वनि से मन कुछ क्षणों के लिए एक बिंदु पर केंद्रित हो जाता है. यही वजह है कि घंटी की आवाज पूजा शुरू होने का संकेत भी बन जाती है. इससे व्यक्ति का ध्यान इधर-उधर भटकने के बजाय पूजा पर टिकने लगता है.
मानसिक शांति का अनुभव
ध्वनि का मन पर असर पड़ता है. शांत और लयबद्ध आवाज कई लोगों को मानसिक सुकून देती है. पूजा के समय घंटी बजने से मन धीरे-धीरे शांत होता है और व्यक्ति वर्तमान क्षण में अधिक सहज महसूस कर सकता है.
सात सेकंड और सात चक्र वाली मान्यता
कहा जाता है कि घंटी की ध्वनि लगभग सात सेकंड तक गूंजती है और यह शरीर के सात ऊर्जा केंद्रों यानी चक्रों को सक्रिय करती है. हालांकि इस दावे के पक्ष में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसे धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है.
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