Rajyog in Kundli: कुंडली में राजयोग का नाम सुनते ही धन, सफलता, ऊंचा पद और सुख-सुविधाओं की उम्मीद होने लगती है. ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति, दृष्टि और विशेष स्थितियों से कई प्रकार के राजयोग बनने की मान्यता है. लेकिन कई बार व्यक्ति की जन्म कुंडली में राजयोग मौजूद होने के बावजूद जीवन में उसके अपेक्षित शुभ परिणाम दिखाई नहीं देते. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राजयोग होते हुए भी व्यक्ति को उसका पूरा लाभ क्यों नहीं मिल पाता?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, केवल कुंडली में राजयोग बनना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. योग बनाने वाले ग्रह की शक्ति, उस पर पड़ने वाली अन्य ग्रहों की दृष्टि, त्रिक भाव के स्वामियों से संबंध, दशा-अंतर्दशा और ग्रह की वास्तविक स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. अगर इन स्थितियों में प्रतिकूलता हो तो राजयोग का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है. आइए जानते हैं वे प्रमुख कारण, जिनकी वजह से कुंडली में राजयोग होने के बाद भी उसका शुभ फल नहीं मिल पाता और इसके लिए कौन से उपाय बताए गए हैं.
कुंडली में राजयोग होते हुए भी क्यों नहीं मिलता शुभ फल?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राजयोग बनाने वाले ग्रह की स्थिति और शक्ति का विशेष महत्व होता है. नीचे दिए गए कारणों को राजयोग के शुभ परिणाम में बाधा से जोड़कर देखा जाता है.
- षड्बल में ग्रह का कमजोर होना: अगर कोई ग्रह कुंडली में राजयोग का निर्माण कर रहा है, लेकिन षड्बल में उसकी स्थिति कमजोर है तो मान्यता है कि वह ग्रह राजयोग का पूरा शुभ फल नहीं दे पाता.
- क्रूर ग्रहों की बुरी दृष्टि: अगर कुंडली में कोई ग्रह राजयोग बना रहा हो, लेकिन उस पर राहु, केतु या शनि जैसे क्रूर ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो तो राजयोग का शुभ प्रभाव कमजोर या नष्ट हो सकता है.
- त्रिक भाव के स्वामियों से संबंध: ज्योतिष में छठे, आठवें और बारहवें भाव को त्रिक भाव कहा जाता है. अगर राजयोग बनाने वाले ग्रह का संबंध इन भावों के स्वामियों से हो जाए तो व्यक्ति को राजयोग के अपेक्षित शुभ परिणाम नहीं मिल पाते.
- अनुकूल दशा-अंतर्दशा का न होना: राजयोग बनाने वाला ग्रह विशेष रूप से तब प्रभावी माना जाता है, जब उसकी दशा या अंतर्दशा चल रही हो. अगर संबंधित ग्रह की अनुकूल दशा-अंतर्दशा नहीं है तो कुंडली में राजयोग मौजूद होने के बावजूद उसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे सकता.
- राजयोग बनाने वाले ग्रहों का कमजोर होना: अगर राजयोग बनाने वाले ग्रह नीच राशि में स्थित हों या अस्त अवस्था में हों तो भी व्यक्ति को राजयोग के पूरे शुभ परिणाम नहीं मिलने की मान्यता है.
कैसे पाएं राजयोग का शुभ परिणाम?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राजयोग बनाने वाले ग्रह के आधार पर अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा का विधान बताया गया है. ग्रह की प्रतिकूल स्थिति में इन उपायों को शुभ फल की प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है.
- सूर्य, गुरु या केतु राजयोग कारक हों: अगर कुंडली में सूर्य, गुरु या केतु राजयोग का निर्माण कर रहे हों तो भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए. मान्यता है कि इससे प्रतिकूल स्थिति में भी शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं.
- शनि, राहु या चंद्रमा राजयोग कारक हों: अगर कुंडली में शनि, राहु या चंद्रमा राजयोग बना रहे हों तो भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. ज्योतिषीय मान्यता है कि इससे राजयोग के शुभ परिणाम प्राप्त होने की संभावना बढ़ सकती है.
- मंगल राजयोग बना रहा हो: अगर जन्म कुंडली में मंगल राजयोग कारक हो तो हनुमान जी की आराधना करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे मंगल से जुड़े राजयोग का शुभ फल मिल सकता है.
- शुक्र राजयोग कारक हो: अगर कुंडली में शुक्र राजयोग का निर्माण कर रहा हो तो माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. मान्यता है कि इससे शुभ परिणाम और लाभ प्राप्त हो सकते हैं.
- बुध राजयोग कारक हो: अगर कुंडली में बुध राजयोग बना रहा हो तो भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इससे राजयोग के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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