Real Puja Shankh: बाजार से शंख खरीदते समय अक्सर लोग उसकी खूबसूरती देखकर मोहित हो जाते हैं, लेकिन असली शंख की पहचान करना भी उतना ही जरूरी है. धार्मिक मान्यताओं में शंख को बेहद शुभ माना गया है, ऐसे में बाजार में इसकी मांग भी काफी रहती है. यही वजह है कि कई जगहों पर असली के साथ नकली शंख भी बिकते हैं.
बाजार में आजकल ज्यादा मुनाफे के लिए बाजार में नकली शंख भी बेचे जा रहे हैं. ऐसे में शंख खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कुछ आसान तरीकों से असली और नकली शंख की पहचान की जा सकती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी. समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में शंख भी शामिल था.
वजन और रंग से करें पहचान
बता दें कि असली शंख ठोस होता है और अपने आकार के हिसाब से उसका वजन भी होता है. इसे रखने या नियमित इस्तेमाल करने पर इसका रंग पीला नहीं पड़ता, बल्कि इसमें हल्की लालिमा या गुलाबी रंगत दिखाई दे सकती है. वहीं, यदि कोई शंख जरूरत से ज्यादा चमकदार दिखाई दे रहा है तो वो नकली भी हो सकता है.
आकार और बनावट
इसके अलावा, शंख को बनाया नहीं जाता, बल्कि यह समुद्र में प्राकृतिक रूप से बनता है. इसलिए हर शंख का आकार और बनावट अलग हो सकती है. यदि किसी दुकान पर एक जैसे आकार और एक जैसी मोटाई वाले कई शंख दिखाई दें तो उनके नकली होने की आशंका होती है. इसके अलावा, असली शंख को कान के पास रखने पर समुद्र की लहरों जैसी हल्की गूंज सुनाई देने की बात भी कही जाती है.
अपनाए गर्म पानी का तरीका
नकली शंख की पहचान के लिए कुछ लोग गर्म पानी का तरीका भी बताते हैं. गर्म पानी में डालने पर नकली शंख फट सकता है या उसका रंग पीला पड़ सकता है. नकली शंख आमतौर पर संगमरमर के पाउडर, प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक जैसी चीजों से बनाए जाते हैं. इन्हें सांचे में तैयार किया जाता है. इसी वजह से नकली शंख एक ही तरह की आकृति और लगभग समान मोटाई वाले दिखाई देते हैं.
घर में असली शंख रखने के फायदें
सनातन धर्म में शंख का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में शंख होता है और उसकी मंगलध्वनि नियमित रूप से गूंजती है, वहां माता लक्ष्मी का वास होता है. हालांकि, अगर घर में नकली शंख रखा जाए या उसका इस्तेमाल किया जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उससे मिलने वाला आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता. इसलिए पूजा के लिए असली शंख रखने की सलाह दी जाती है.
जिस घर में हर दिन शंख की ध्वनि गूंजती है, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं, इसलिए शंख को उनका सहोदर भाई कहा जाता है. भगवान विष्णु भी अपने हाथ में शंख धारण करते हैं. वहीं, माता गायत्री के साथ भी शंख का विशेष संबंध बताया गया है.
तनाव कम करने और मन को शांति देने में मददगार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से शंख बजाने से तनाव कम करने और मन को शांति देने में मदद मिल सकती है. इससे मानसिक तनाव और बेचैनी में भी राहत मिलने की बात कही जाती है. कुछ लोग शंख बजाने को सांस से जुड़ी समस्याओं में भी लाभकारी मानते हैं. वहीं, अवसाद से परेशान व्यक्ति को भी इससे सुकून और शांति मिलने की मान्यता है.
शंख मुख्य रूप से दो तरह के बताए जाते हैं. दक्षिणावर्ती शंख का मुख दाईं ओर होता है और इसे काफी दुर्लभ माना जाता है. इसे आमतौर पर पूजा स्थान पर रखा जाता है. इसके अलावा वामावर्ती शंख होता है, जिसका मुख बाईं ओर होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी मंगलध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.