Sawan Amavasya: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप और पितरों का स्मरण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पूर्वजों की शांति और सद्गति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार 12 अगस्त को अमावस्या तिथि पड़ रही है. इस दिन व्यक्ति को अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करना चाहिए.
पितरों की तपस्या, त्याग और मेहनत से ही हमारा जीवन आगे बढ़ता है.इसलिए इस दिन उनके निमित्त स्नान, दान, जप और तर्पण जैसे धार्मिक कार्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है. इसके अलावा और भी कई उपायो को करके आप अपने पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं और मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर सकते है.
सूर्य को दें अर्घ्य, कुत्ते को खिलाएं रोटी
अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जल स्रोत के पास जाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. इस दौरान गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके बाद कुत्ते को रोटी खिलाए. भोजन करते समय पहला निवाला कुत्ते के लिए निकालना चाहिए. वहीं शाम के समय भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण करते हुए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की एक माला का जाप करने और गाय को रोटी खिलाए.
दरवाजे पर आए पशु को न भगाएं
ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, अमावस्या के दिन यदि घर के दरवाजे पर कुत्ता, गाय, बछड़ा या सांड जैसे पशु आएं तो उन्हें दुत्कारकर भगाना नहीं चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि पितर विभिन्न रूपों में आकर अपना अंश स्वीकार कर सकते हैं. इसलिए इस दिन पशुओं के प्रति सम्मान और करुणा रखना चाहिए. अमावस्या की शाम मां लक्ष्मी की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है.
इसके अलावा, अमावस्या की शाम कमल के आसन पर विराजमान मां लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें, और उनके सामने घी का दीपक जलाएं. इसके बाद चावल की ढेरी बनाकर उसमें हल्दी की गांठ रखें और मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप करें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों की शांति के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आने की मान्यता है.

