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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, शान्ति ज्ञानी या विद्वान बनने से नहीं, भक्ति में सराबोर होने से मिलती है। सत्य का त्याग करने वालों को शान्ति कहां से मिलेगी? शान्ति तो सच्चाई के मार्ग पर चलने वालों को मिलती है। भावों से भरा हुआ हृदय ही परमात्मा के निकट द्रवित होता है और उसी को जीवन में शान्ति मिलती है। आज का मनुष्य न घर छोड़ सकता है, न घर में शान्ति से रह सकता है।
संयम एवं सादगी से ही जीवन में शान्ति और संतोष मिलता है। मान और प्रेम दूसरों को देते रहो, इससे मन शान्त रहेगा। सुख बाहरी सुविधाओं में नहीं, आन्तरिक तृप्ति में रहता है। दूसरे को सुखी करके आनन्द का अनुभव करने वाला महान सुखी है। श्री राम और श्री भारत जैसे भाई हों, तभी रामराज्य आ सकता है। संतोष से ही शान्ति मिलती है। सर्वेश्वर से स्थापित किया गया सम्बन्ध ही शान्ति प्रदान करता है।
अनेक जन्मों से संसार के सुखों का उपभोग करते आ रहे हैं, फिर भी शान्ति नहीं मिली, तो भविष्य में कहां से मिलेगी? मनुष्य चाहे अपना कर्तव्य भूल जाए, लेकिन परमात्मा नहीं भूलता। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।