Vastu Tips For Ancestors Photo: हिंदू धर्म में पितरों यानी पूर्वजों का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि जिन लोगों पर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. वहीं, पितरों के अप्रसन्न होने पर व्यक्ति को जीवन में कई तरह की बाधाओं और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यही कारण है कि सनातन परंपरा में पितरों का सम्मान करने और उनका स्मरण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.
कई लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी या अन्य पूर्वजों की तस्वीर घर में लगाते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार तस्वीर लगाने के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. यदि इन नियमों का पालन किया जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है. वहीं गलत स्थान या दिशा में पितरों की तस्वीर लगाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ने की भी मान्यता है. आइए जानते हैं कि घर में पितरों की तस्वीर लगाने के वास्तु नियम क्या कहते हैं.
पितरों की तस्वीर लगाने के लिए कौन-सी दिशा सबसे शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों की तस्वीर लगाने के लिए दक्षिण दिशा सबसे शुभ मानी गई है. मान्यता है कि यदि दक्षिण दिशा की दीवार पर पूर्वजों की तस्वीर लगाई जाए तो उनका मुख उत्तर दिशा की ओर रहता है, जिसे शुभ माना जाता है. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें पितरों की तस्वीर
अक्सर लोग अपने पूर्वजों की तस्वीर भगवान की मूर्तियों या तस्वीरों के साथ घर के मंदिर में रख देते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता. शास्त्रों में देवताओं और पितरों का स्थान अलग-अलग बताया गया है. इसलिए पितरों की तस्वीर को पूजा घर में भगवान के साथ रखने से बचना चाहिए.
बेडरूम में तस्वीर लगाने से करें परहेज
वास्तु शास्त्र के अनुसार शयनकक्ष यानी बेडरूम में भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से दांपत्य जीवन में तनाव और मानसिक अशांति बढ़ सकती है. इसलिए पूर्वजों की तस्वीर के लिए बेडरूम की बजाय घर का कोई अन्य उपयुक्त स्थान चुनना चाहिए.
रसोईघर में भी न रखें पूर्वजों की तस्वीर
रसोईघर को घर का सबसे पवित्र और ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है. वास्तु के अनुसार किचन में पितरों की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए. मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
जीवित और दिवंगत लोगों की तस्वीर साथ न लगाएं
वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि कभी भी जीवित व्यक्तियों की तस्वीर के साथ पूर्वजों या दिवंगत लोगों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता और इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है.
इन स्थानों पर भी न लगाएं तस्वीर
पूर्वजों की तस्वीर कभी भी सीढ़ियों के नीचे, टॉयलेट के पास या ऐसे स्थान पर नहीं लगानी चाहिए, जहां उनका सम्मान प्रभावित हो. ऐसे स्थान वास्तु की दृष्टि से उपयुक्त नहीं माने जाते.
पितरों की तस्वीर से जुड़े इन नियमों का भी रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों की तस्वीर पर धूल-मिट्टी नहीं जमने देनी चाहिए. समय-समय पर उसकी साफ-सफाई करते रहना शुभ माना जाता है. इसके अलावा एक ही पूर्वज की एक से अधिक तस्वीरें घर में लगाने से भी बचना चाहिए. मान्यता है कि पितरों की तस्वीर को दीवार पर टांगने की बजाय किसी शेल्फ या उचित स्थान पर रखना अधिक शुभ माना जाता है. वहीं, घर का ड्राइंग रूम पूर्वजों की तस्वीर रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है. यदि पितरों की तस्वीर पर माला चढ़ाई गई हो, तो उसे लंबे समय तक उसी स्थिति में न रहने दें. समय-समय पर माला बदलते रहना और तस्वीर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है.
सम्मान और श्रद्धा का रखें विशेष ध्यान
पितरों की तस्वीर केवल सजावट का हिस्सा नहीं होती, बल्कि वह परिवार की स्मृतियों और श्रद्धा का प्रतीक होती है. इसलिए तस्वीर को हमेशा साफ, सम्मानजनक और उचित स्थान पर रखें. धार्मिक मान्यताओं और वास्तु नियमों का पालन करते हुए पूर्वजों का सम्मान करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की मान्यता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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