ADB India GDP Growth: एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. नए अनुमान में 40 आधार अंक की बढ़ोतरी की गई है. एडीबी ने अपने बयान में कहा कि भारत में मजबूत सरकारी निवेश और निर्यात में ठोस वृद्धि आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं. इन कारकों की मदद से दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी बढ़ाया गया है.
दक्षिण एशिया की विकास दर का अनुमान भी बढ़ा
एडीबी के मुताबिक, दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि का अनुमान इस साल के लिए जुलाई में जताए गए 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है. भारत की मजबूत आर्थिक गतिविधियां इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा रही हैं. हालांकि, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2025 के 5.5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसके बाद 2027 में इसके मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत होने की संभावना जताई गई है. एडीबी ने 2026 के लिए क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में जारी अपने पिछले अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक बढ़ाया है.
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था लचीली, लेकिन जोखिम बढ़ रहे: मासातो कांडा
एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, “क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं.” उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट और वित्तीय बाजारों में फिर से बढ़ते जोखिमों के बीच सरकारों के लिए सबसे अधिक प्रभावित लोगों की सुरक्षा और तैयारी करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है. कांडा के मुताबिक, एडीबी ऐसे प्रयासों का मजबूती से समर्थन कर रहा है.
सरकारी निवेश और टेक्नोलॉजी निर्यात से मिल रहा सहारा
एडीबी ने कहा कि मजबूत निवेश, सरकारी प्रोत्साहन और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश चक्र से बढ़े टेक्नोलॉजी निर्यात क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत होता अल नीनो ऊर्जा तथा खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं. इससे आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान घटाया
एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (एडीओ) सितंबर 2026 में एडीबी ने 2026 के लिए क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.2 प्रतिशत कर दिया है. बैंक के अनुसार, कीमतों को स्थिर करने के लिए किए गए उपायों ने लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से कम किया है.
अल नीनो और संघर्ष से बढ़ सकती हैं ऊर्जा व खाद्य कीमतें
एडीबी ने क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य के सामने दो प्रमुख जोखिम बताए हैं. पहला जोखिम संघर्षों का बढ़ना है, खासकर मध्य पूर्व में संघर्ष के विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध के तेज होने की आशंका. इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं. इसका असर अन्य जिंसों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. दूसरा जोखिम बहुत मजबूत अल नीनो है, जिसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है. इससे ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है और कृषि उत्पादन घट सकता है. नतीजतन ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा है. एडीबी ने यह भी कहा कि एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में तेज गिरावट, वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना और व्यापार नीति को लेकर फिर से बढ़ती अनिश्चितता आर्थिक वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है.