AI Jobs India: बुधवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी आधे से ज्यादा नौकरियां बेंगलुरु और दिल्ली-NCR में केंद्रित हैं. इनमें अकेले बेंगलुरु की हिस्सेदारी 25.4% बताई गई है. सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड के विश्लेषण के अनुसार, दिसंबर 2025 तक नौकरी डॉट कॉम पर मौजूद 64,500 से अधिक सक्रिय जॉब लिस्टिंग में दिल्ली-NCR का हिस्सा 24.8% और मुंबई का 19.2% रहा. इस तरह ये तीनों शहर मिलकर देश की करीब 70% AI नौकरियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
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किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा AI भर्ती
रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग (सॉफ्टवेयर और क्वालिटी एश्योरेंस), डेटा साइंस व एनालिटिक्स और कस्टमर सक्सेस, सर्विस और ऑपरेशंस एआई भर्ती को बढ़ावा देने वाले टॉप तीन प्रमुख क्षेत्र हैं. कंपनी का कहना है कि यह रुझान दिखाता है कि एआई अब केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवसाय के फ्रंट-एंड कार्यों में भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत केवल एआई के लिए कोड नहीं लिख रहा है, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि इसे वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए कैसे लागू और संचालित किया जाए.
ऑफिस स्पेस की मांग भी बढ़ी
एआई से संबंधित नौकरियों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का असर अब ऑफिस स्पेस की मांग पर भी साफ दिखाई दे रहा है. वर्ष 2025 में ऑफिस लीजिंग के मामले में बेंगलुरु 26% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कुल लीजिंग गतिविधि 82.6 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई. इसके अलावा, देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) से जुड़ी कुल लीजिंग का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा भी बेंगलुरु के खाते में गया. वहीं दिल्ली-NCR में केवल आईटी सेक्टर ही नहीं, बल्कि कंसल्टिंग, फिनटेक, हेल्थकेयर और पब्लिक सेक्टर समेत कई क्षेत्रों से एआई विशेषज्ञों की मजबूत मांग देखने को मिल रही है.
भारत बन रहा वैश्विक AI नवाचार केंद्र
सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और एमईए) अंशुमन मैगजीन ने कहा कि एआई अब केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह भारत की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की विकास गाथा का अहम हिस्सा बन चुका है. उन्होंने कहा कि एआई पेशेवरों की बढ़ती मांग सिर्फ रोजगार का ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक कंपनियां अब भारत को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि संपूर्ण नवाचार केंद्र के रूप में देख रही हैं. यह बदलाव भारत की आर्थिक संरचना और वैश्विक डिजिटल मूल्य शृंखला में उसकी स्थिति को नया रूप देगा.
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