कैफे 2027 नियमों में नरमी के संकेत, ऑटो सेक्टर को मिल सकती है राहत

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

CAFE Norms Relaxation: केंद्र सरकार कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता नियमों में 2027 से 2032 के बीच ढील देने की तैयारी में है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से घरेलू ऑटो उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से सख्त मानकों को लेकर दबाव में था. ऊर्जा मंत्रालय द्वारा ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) के सहयोग से तैयार किए गए संशोधित मसौदे में अब पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया गया है. सरकार ने सख्त लक्ष्य थोपने के बजाय धीरे-धीरे नियमों को लागू करने का फैसला किया है.

क्या हैं नए प्रस्तावित बदलाव?

कैफे 2027, भारत के फ्लीट स्तर पर ईंधन दक्षता सुधार का तीसरा चरण है. इसका उद्देश्य ऑटोमोबाइल क्षेत्र को देश के जलवायु और ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप बनाना है. नए मसौदे के अनुसार, ये नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और वित्त वर्ष 2032 तक चरणबद्ध तरीके से सख्त किए जाएंगे. पहले के मसौदे की तुलना में नए प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे उद्योग को अनुपालन में आसानी होगी.

उत्सर्जन मानकों में नरमी

रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों में उत्सर्जन वक्र को संशोधित किया गया है. नया ढलान सूत्र वित्त वर्ष 2028 में 0.00158 रखा गया है, जो धीरे-धीरे घटकर वित्त वर्ष 2032 तक 0.00131 हो जाएगा. इस बदलाव से ईंधन खपत के स्तर में पहले के मुकाबले थोड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश रहेगी, जिससे कंपनियों को राहत मिलेगी.

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा

नए मसौदे में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए सुपर क्रेडिट का प्रावधान रखा गया है. इसका मतलब है कि इन वाहनों को उत्सर्जन गणना में कई गुना गिना जा सकेगा. प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड वाहनों को अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे कंपनियां इन तकनीकों में निवेश बढ़ा सकती हैं.

क्रेडिट ट्रेडिंग से मिलेगा लचीलापन

सरकार ने निर्माताओं के बीच क्रेडिट ट्रेडिंग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव रखा है. इससे कंपनियां अपने अनुपालन दायित्वों को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकेंगी. अगर कोई कंपनी लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वह अपने अतिरिक्त क्रेडिट अन्य कंपनियों को बेच सकेगी.

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

हालांकि नियमों में ढील दी जा रही है, लेकिन अनुपालन न करने पर कड़े जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, बड़े निर्माताओं पर करोड़ों रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जिससे कंपनियों पर नियमों का पालन करने का दबाव बना रहेगा. प्रस्ताव में छोटे निर्माताओं के लिए राहत भी दी गई है.

प्रति वर्ष 1,000 से कम यूनिट उत्पादन करने वाली कंपनियों को इन नियमों से छूट दी जाएगी. इससे छोटे और विशेष वाहन निर्माता बिना अतिरिक्त दबाव के अपने कारोबार को जारी रख सकेंगे.

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