Coal Supply: देश में बिजली उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति में लगातार सुधार हो रहा है. कोयला मंत्रालय के मुताबिक, पिछले चार दिनों में कोयला लोडिंग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मंत्रालय के अनुसार, 3 सितंबर को बिजली क्षेत्र के लिए जहां 370 रैक प्रतिदिन कोयला भेजा जा रहा था, वहीं 6 सितंबर को यह बढ़कर 444 रैक प्रतिदिन हो गया.
यानी चार दिनों में 74 रैक प्रतिदिन की शुद्ध बढ़ोतरी हुई है. मंत्रालय ने बताया कि सिर्फ 6 सितंबर को ही पिछले दिन के मुकाबले कोयला लोडिंग में 31 रैक प्रतिदिन की बढ़ोतरी दर्ज की गई. पिछले चार दिनों से लोडिंग में लगातार सुधार का यह रुझान बना हुआ है.
बिजली क्षेत्र को पर्याप्त कोयला देने की कोशिश
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), उसकी सहायक कंपनियों, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) और कैप्टिव कोयला खदान संचालकों के समन्वित प्रयासों से बिजली क्षेत्र को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने की दिशा में सुधार हुआ है. 6 सितंबर को लगभग सभी प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनियों ने अपनी लोडिंग क्षमता में बढ़ोतरी दर्ज की. इनमें महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने सबसे ज्यादा सुधार किया. MCL की लोडिंग एक दिन में 12 रैक बढ़कर 111 रैक प्रतिदिन हो गई.
इन कंपनियों की लोडिंग में भी हुआ सुधार
कैप्टिव कोल ब्लॉकों की लोडिंग में 6 रैक की बढ़ोतरी हुई और यह 72 रैक प्रतिदिन पहुंच गई. वहीं, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की लोडिंग 8 रैक बढ़कर 25 रैक प्रतिदिन हो गई. नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की लोडिंग 3 रैक बढ़कर 35 रैक प्रतिदिन हो गई. इसके अलावा प्राइवेट वॉशरी और गुड्स शेड्स की लोडिंग भी 3 रैक बढ़कर 42 रैक प्रतिदिन पहुंच गई. सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने भी क्रमशः 2 और 1 रैक की बढ़ोतरी दर्ज की.
इसके साथ CCL की लोडिंग 36 रैक प्रतिदिन और SECL की लोडिंग 46 रैक प्रतिदिन हो गई. वहीं, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की लोडिंग क्रमशः 23 और 29 रैक प्रतिदिन के पिछले स्तर पर बनी रही. कोयला लोडिंग में हुए इन सुधारों के बाद CIL साइडिंग्स से कुल कोयला लोडिंग 305 रैक प्रतिदिन तक पहुंच गई. यह पिछले दिन की तुलना में 26 रैक प्रतिदिन अधिक है.
कम कोयला भंडार वाले पावर प्लांट पर नजर
कोयला मंत्रालय ने उन ताप विद्युत संयंत्रों पर भी विशेष निगरानी बढ़ा दी है, जहां कोयले का भंडार निर्धारित आवश्यकता के 25 प्रतिशत से कम है और जिन्हें क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है. इन बिजली संयंत्रों की स्थिति में सुधार के लिए अतिरिक्त कोयला आपूर्ति समेत कई सुधारात्मक कदम पहले से लागू किए जा रहे हैं. सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि कोयले की उपलब्धता की कमी का असर बिजली उत्पादन पर न पड़े. मंत्रालय ने कहा कि कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड बिजली क्षेत्र की मांग के अनुरूप कोयले की आपूर्ति बनाए रखने और रैक लोडिंग में जारी सुधार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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