Data Center Growth India: भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है. केयरएज रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030 तक देश की डेटा सेंटर क्षमता करीब चार गुना बढ़कर 4 गीगावाट तक पहुंच सकती है. इस विस्तार के लिए लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना जताई गई है.
वैश्विक औसत से अभी पीछे भारत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति मिलियन इंटरनेट यूजर्स पर केवल 1.2 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता उपलब्ध है, जो वैश्विक औसत 5 मेगावाट से काफी कम है. यही अंतर आने वाले समय में तेज ग्रोथ की बड़ी वजह बन सकता है, क्योंकि मांग और क्षमता के बीच बड़ा गैप मौजूद है.
डिजिटलीकरण और AI बना रहे हैं ग्रोथ के इंजन
भारत में तेजी से बढ़ता डिजिटलीकरण, लागत प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता उपयोग डेटा सेंटर इंडस्ट्री को आगे बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक भारत की वैश्विक डेटा सेंटर बाजार में हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत और कुल क्षमता 1.2 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है.
हाल के वर्षों में दोगुनी हुई क्षमता
वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच देश की को-लोकेशन डेटा सेंटर क्षमता दोगुनी होकर 1.2 गीगावाट हो गई है. इसके साथ ही, औसतन 90 प्रतिशत से अधिक उपयोग स्तर ने भी इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाया है.
राजस्व में तेज वृद्धि का अनुमान
केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच डेटा सेंटर उद्योग के राजस्व में करीब 24 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का अनुमान लगाया है. इस दौरान EBITDA मार्जिन 40 से 42 प्रतिशत के बीच स्थिर रहने की संभावना है, हालांकि भारी निवेश के चलते लीवरेज स्तर ऊंचा बना रह सकता है.
लंबे समझौते देंगे स्थिरता
इस सेक्टर में लंबी अवधि के अनुबंधों के जरिए स्थिर राजस्व और मजबूत नकदी प्रवाह सुनिश्चित होता है. इससे कंपनियों को वित्तीय स्थिरता मिलती है और ग्राहकों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता भी बनी रहती है.
निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका
केयरएज रेटिंग्स की निदेशक पूजा जालान के अनुसार, इस सेक्टर में भारी पूंजी निवेश, मजबूत निवेशकों की भागीदारी और बड़े इक्विटी निवेश तेजी से विकास को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि AI आधारित मांग इस विकास को और गति देगी, लेकिन इसके लिए मजबूत बिजली अवसंरचना बेहद जरूरी होगी.
लागत और देरी बनी चुनौती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में डेटा सेंटर की लागत में 50 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. इसका मुख्य कारण महंगी जमीन, एडवांस कूलिंग तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश है. इसके अलावा मंजूरी में देरी और प्रोजेक्ट शुरू होने में लगने वाला समय भी बढ़ा है.
भविष्य में AI बढ़ाएगा मांग
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर तेज किरण के अनुसार, फिलहाल डेटा सेंटर की मांग एंटरप्राइज IT और क्लाउड स्टोरेज से आ रही है, लेकिन आने वाले 5 से 7 वर्षों में AI आधारित कार्यभार इस सेक्टर के विकास को नई गति देगा.
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