Egg Price Hike: प्याज, चीनी और दाल के बाद अब अंडे के दाम बढ़ने की आशंका, सर्दियों में ₹25 तक पहुंच सकता है भाव

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Egg Price Hike: प्याज, चीनी और दाल की बढ़ती कीमतों के बीच अब अंडे की कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है. पिछले एक साल में देश में अंडे के दाम करीब 35-40% तक बढ़ चुके हैं. वहीं, आने वाले महीनों में इनकी कीमतों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है. द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के आंकड़ों के अनुसार, इस समय फार्म पर एक अंडे की कीमत करीब 7 रुपये है.

वहीं, कई बाजारों में यही अंडा 8.50 रुपये से 9 रुपये तक की खुदरा कीमत पर बिक रहा है. पोल्ट्री इंडस्ट्री और बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, इस साल सर्दियों में अंडे की कीमत 20-25 रुपये प्रति अंडे तक पहुंच सकती है. हालांकि, इतनी ऊंची कीमत मुख्य रूप से ब्रांडेड, प्रीमियम और स्पेशलिटी अंडों के लिए होने की संभावना है.

क्या सच में 20-25 रुपये तक पहुंच जाएगा अंडे का भाव?

अंडे की कीमतों में 20-25 रुपये तक की बढ़ोतरी की संभावना को सभी तरह के अंडों पर लागू नहीं माना जा रहा है. इतनी बड़ी कीमत खास प्रीमियम या स्पेशल ब्रांड के अंडों में देखने को मिल सकती है. सामान्य क्वॉलिटी के अंडों के लिए इतनी कीमत चुकाने की जरूरत पड़ने की संभावना कम है. हालांकि, अंडों के उत्पादन की लागत में तेजी से बढ़ोतरी जरूर हुई है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका मक्के की है, क्योंकि पोल्ट्री फीड में मक्के का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

सरकार की 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के चलते डिस्टिलरीज में मक्के की मांग बढ़ी है. हाल की रिपोर्ट्स में इंडस्ट्री के अनुमानों के हवाले से बताया गया है कि भारत में पैदा होने वाले मक्के का करीब 37% हिस्सा अब इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है. मक्के की बढ़ती मांग का असर इसकी कीमत पर भी पड़ा है. पिछले तीन साल में मक्के की कीमत 14,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर करीब 26,500 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है.

मक्के की बढ़ती कीमत से क्यों महंगा हो रहा अंडा?

हाल की रिपोर्ट्स में संसद के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में मक्के का उत्पादन करीब 43.4 मिलियन टन है. इसमें से लगभग 17 मिलियन टन मक्के का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है. वहीं, पोल्ट्री फार्मिंग में इस्तेमाल होने वाले मुर्गियों के फीड में करीब 60-70% हिस्सा अकेले मक्के का होता है. ऐसे में मक्के की कीमत बढ़ने से मुर्गियों के दाने की लागत भी बढ़ जाती है.

इसका सीधा असर अंडे की उत्पादन लागत पर पड़ता है और आखिरकार कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. मक्के के अलावा सोयाबीन भी पोल्ट्री फीड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. मुर्गियों के चारे में प्रोटीन के प्रमुख स्रोत के तौर पर सोयाबीन का इस्तेमाल किया जाता है. सोयाबीन मील की कीमतों में भी भारी उछाल आने से पोल्ट्री किसानों की लागत और बढ़ गई है.

सर्दियों में बढ़ सकती है अंडों की मांग

भारत में आम तौर पर सर्दियों के मौसम में अंडों की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में अगर मांग बढ़ने के साथ पोल्ट्री फीड की कीमतें भी ऊंची बनी रहती हैं, तो अंडों के भाव पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि देश में हर अंडा 20-25 रुपये में बिकने लगेगा. प्रीमियम, खास या ब्रांडेड अंडों की कीमत सामान्य अंडों से काफी अलग होती है.

इसके अलावा, अंडों की खुदरा कीमतें राज्य और शहर के हिसाब से भी अलग-अलग रहती हैं. इंडस्ट्री के अधिकारियों को उम्मीद है कि सर्दियां आने के साथ अंडों की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. खासकर अगर मक्के का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में इसी तरह जारी रहता है और पोल्ट्री फीड की लागत में कमी नहीं आती है, तो आने वाले समय में अंडे महंगे हो सकते हैं.

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