EPF New Scheme 2026: नौकरीपेशा लोगों और भविष्य के लिए प्रोविडेंट फंड में बचत करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. सरकार ने इस हफ्ते देशभर में नई एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड यानी EPF स्कीम 2026 लागू कर दी है. नई व्यवस्था के तहत पीएफ योगदान से लेकर आंशिक निकासी, नौकरी छोड़ने के बाद पूरा पैसा निकालने, डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों तक कई अहम प्रावधान किए गए हैं. ऐसे में करीब आठ करोड़ सब्सक्राइबर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर नई स्कीम से उनके EPF खाते पर क्या असर पड़ेगा.
केंद्र सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ को लागू करने की दिशा में नई EPF स्कीम का ऐलान किया है. इस व्यवस्था ने पुरानी EPF स्कीम 1952 की जगह ली है. नई स्कीम का उद्देश्य पीएफ से जुड़े नियमों को आसान बनाना, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करना, पारदर्शिता बढ़ाना और कागजी प्रक्रिया को कम करना है. इसके साथ ही सरकार का जोर इस बात पर है कि EPF से जुड़ी प्रक्रियाएं कर्मचारियों के लिए ज्यादा आसान हों और कामकाज का तरीका सरल बनाया जा सके. नई व्यवस्था के जरिए यूजर्स की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर करने का भी लक्ष्य रखा गया है, ताकि कर्मचारी नौकरी के दौरान, नौकरी छोड़ने से पहले या उसके बाद अपने फंड का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकें.
EPF योगदान के नियम में क्या हुआ बदलाव?
नई स्कीम के मुताबिक, 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पर 12 प्रतिशत की दर से पीएफ योगदान जारी रहेगा. इस हिसाब से अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह का पीएफ कंट्रीब्यूशन बना रहेगा. हालांकि, जिन कर्मचारियों की सैलरी इससे ज्यादा है, उनके लिए अतिरिक्त पीएफ कटवाने का फैसला उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा. यानी अधिक सैलरी होने भर से कंपनी कर्मचारी की अनुमति के बिना तय सीमा से ज्यादा पीएफ नहीं काट सकेगी. इसे एक उदाहरण से समझें. मान लीजिए किसी कर्मचारी की मासिक सैलरी 1 लाख रुपये है. नई व्यवस्था के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कंपनी कर्मचारी की अनुमति के बिना 1,800 रुपये से अधिक पीएफ नहीं काट सकती. अगर कर्मचारी अतिरिक्त पीएफ योगदान करना चाहता है, तो यह उसकी इच्छा पर निर्भर करेगा.
आंशिक निकासी के नियम हुए आसान
नई EPF स्कीम में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक आंशिक निकासी यानी Partial Withdrawal से जुड़ा है. पहले पीएफ की आंशिक निकासी के लिए 13 अलग-अलग श्रेणियां थीं. अब इन श्रेणियों को घटाकर केवल तीन प्रमुख वर्गों में समेट दिया गया है. पहली श्रेणी आवश्यक जरूरतों से जुड़ी है. इसके तहत बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी जैसी जरूरतों को शामिल किया गया है. दूसरी श्रेणी आवास संबंधी जरूरतों के लिए रखी गई है. वहीं तीसरी श्रेणी विशेष परिस्थितियों से संबंधित है. इस बदलाव का उद्देश्य आंशिक निकासी से जुड़े नियमों को सरल बनाना है, ताकि सदस्यों को अलग-अलग श्रेणियों की जटिल प्रक्रिया से न गुजरना पड़े.
नौकरी छोड़ने के बाद पूरा PF निकालने के नियम में बदलाव
नई स्कीम में नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है. नए नियमों के तहत अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है, तो पूरा पीएफ निकालने के लिए न्यूनतम सदस्यता अवधि से जुड़ी शर्तें लागू नहीं होंगी. इस बदलाव का सीधा संबंध उन कर्मचारियों से है, जो नौकरी छोड़ने के बाद अपने EPF खाते में जमा पूरी रकम निकालना चाहते हैं. नई व्यवस्था में ऐसे सदस्यों के लिए न्यूनतम सदस्यता अवधि की शर्त नहीं रखी गई है.
क्लेम सेटलमेंट में देरी हुई तो 12% ब्याज
EPF क्लेम सेटलमेंट से जुड़ी देरी को लेकर भी नई स्कीम में अहम व्यवस्था की गई है. नए नियमों के मुताबिक, अगर EPFO बिना किसी ठोस वजह के सेटलमेंट प्रक्रिया में देरी करता है, तो सदस्य को 12 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा. यह प्रावधान क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से किया गया है. यानी बिना उचित कारण के देरी होने की स्थिति में सदस्य के लिए ब्याज का प्रावधान रखा गया है.
आधार, PAN और बैंक अकाउंट की जानकारी होगी जरूरी
नई EPF स्कीम में डिजिटल प्रोसेसिंग पर विशेष जोर दिया गया है. इसके तहत सदस्यों को अपने आधार, PAN और आधार से जुड़े बैंक अकाउंट की जानकारी उपलब्ध करानी होगी. इन जानकारियों का इस्तेमाल क्लेम और दूसरी सेवाओं की डिजिटल प्रोसेसिंग के लिए किया जाएगा.
इसका उद्देश्य आंशिक निकासी और EPF से जुड़ी दूसरी सेवाओं के लिए ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाना है. आधार, PAN और बैंक अकाउंट की जानकारी के जरिए डिजिटल सत्यापन और ऑनलाइन सेवाओं की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का लक्ष्य रखा गया है.
कंपनियों और नियोक्ताओं को 15 दिनों के भीतर करना होगा यह काम
नई स्कीम लागू होने के बाद केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं. नई व्यवस्था के मुताबिक, स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर कंपनी या नियोक्ता को फॉर्म-5 में कर्मचारियों से जुड़ी जरूरी जानकारियां अपडेट करानी होंगी.
इन जानकारियों में कर्मचारियों का आधार, PAN, UAN और ग्रॉस वेज से संबंधित विवरण शामिल है. यानी नियोक्ताओं को निर्धारित समय के भीतर कर्मचारियों का संबंधित रिकॉर्ड अपडेट करना होगा.
Partial Withdrawal के बाद 25 प्रतिशत बैलेंस रखना जरूरी
आंशिक निकासी के नियमों में सरलता के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है. नए नियमों के तहत Partial Withdrawal के लिए EPF खाते में कम से कम 25 प्रतिशत बैलेंस बनाए रखना जरूरी होगा. इसका मतलब है कि सदस्य अपने खाते में जमा पूरी राशि आंशिक निकासी के तहत नहीं निकाल सकेगा.
उसे खाते में कम से कम 25 प्रतिशत रकम बनाए रखनी होगी. इस व्यवस्था के मुताबिक, कुल जमा राशि में से परिस्थितियों के आधार पर 50 से 75 प्रतिशत तक रकम निकाली जा सकती है. इस तरह आंशिक निकासी के बाद भी खाते में एक निश्चित न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान किया गया है.
नई EPF स्कीम में क्या पहले जैसा ही रहा?
नई EPF स्कीम 2026 में कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को पहले की तरह ही जारी रखा गया है. इनमें अनिवार्य EPF योगदान, मौजूदा सदस्यों की सदस्यता, EDLI स्कीम के फायदे और पेंशन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं.
कर्मचारी और नियोक्ता का 12% योगदान जारी
अनिवार्य EPF योगदान की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य पीएफ योगदान पहले की तरह मूल वेतन का 12 प्रतिशत बना रहेगा.
वहीं कुछ अधिसूचित संस्थानों के लिए मौजूदा 10 प्रतिशत की दर लागू रहेगी. यानी नई स्कीम लागू होने के बावजूद अनिवार्य योगदान की मूल व्यवस्था को बरकरार रखा गया है.
पुराने EPF सब्सक्राइबर्स को नहीं खुलवाना होगा नया खाता
मौजूदा EPF सब्सक्राइबर्स के लिए भी राहत की बात यह है कि उनकी सदस्यता बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी. नई स्कीम लागू होने के बाद उन्हें दोबारा सदस्यता लेने या नया EPF खाता खुलवाने की जरूरत नहीं होगी. मौजूदा सब्सक्राइबर्स अपने आप EPF स्कीम 2026 के तहत सदस्य बन जाएंगे. यानी पुरानी व्यवस्था के तहत पहले से जुड़े कर्मचारियों की सदस्यता नई स्कीम में स्वतः जारी रहेगी.
EDLI स्कीम के फायदों में नहीं होगा बदलाव
नई EPF स्कीम की वजह से एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी EDLI स्कीम के तहत मिलने वाले फायदों में कोई बदलाव नहीं होगा. अकाउंट होल्डर की मृत्यु होने की स्थिति में नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए इंश्योरेंस पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी. इसके तहत कम से कम 50,000 रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस पेमेंट मिलने का प्रावधान बना रहेगा. इसका मतलब है कि नई EPF व्यवस्था लागू होने के बावजूद EDLI से जुड़े बीमा लाभ पहले की तरह जारी रहेंगे.
EPS 95 के मौजूदा सदस्यों का क्या होगा?
एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995 यानी EPS 95 के मौजूदा सदस्यों के लिए भी सदस्यता जारी रखने की व्यवस्था की गई है. मौजूदा सदस्य अपने आप EPS 2026 के सदस्य बन जाएंगे. इसके लिए उन्हें अलग से नई सदस्यता प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी.
इसके साथ ही जिन सदस्यों की पेंशन पहले से स्वीकृत है, उन्हें वह पेंशन बिना किसी रुकावट के मिलती रहेगी. यानी नई व्यवस्था लागू होने के कारण पहले से मंजूर पेंशन भुगतान प्रभावित नहीं होगा.
8 करोड़ EPF सब्सक्राइबर्स के लिए क्यों अहम है नई स्कीम?
नई EPF स्कीम 2026 का असर देश के करीब आठ करोड़ सब्सक्राइबर्स पर पड़ने वाला है. इसमें पीएफ योगदान की सीमा, अतिरिक्त योगदान की अनुमति, आंशिक निकासी की श्रेणियों में बदलाव, खाते में न्यूनतम 25 प्रतिशत बैलेंस बनाए रखने की शर्त, नौकरी छोड़ने के बाद पूरी निकासी और डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं.
इसके अलावा, आधार, PAN और आधार से जुड़े बैंक अकाउंट की जानकारी के जरिए क्लेम प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है. कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए भी कर्मचारियों के आधार, PAN, UAN और ग्रॉस वेज से जुड़ी जानकारियां निर्धारित समय के भीतर अपडेट करने की जिम्मेदारी तय की गई है.
वहीं अनिवार्य पीएफ योगदान की व्यवस्था पहले जैसी बनी रहेगी. मौजूदा EPF सब्सक्राइबर्स को नया खाता नहीं खुलवाना होगा, EDLI स्कीम के फायदे जारी रहेंगे और EPS 95 के मौजूदा सदस्यों की पेंशन व्यवस्था भी बिना रुकावट जारी रहेगी.
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