भारतीय चुनावी सिस्टम के कायल हुए डोनाल्ड ट्रंप, बोले ‘अमेरिका को भारत से सीखने की जरूरत’

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Donald Trump Praises India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी सिस्टम की खुलकर तारीफ करते हुए एक बार फिर अमेरिका में चुनावों को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है. ट्रंप ने कहा कि भारत में मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोटो पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाता है और अमेरिका को भी चुनाव प्रक्रिया में ऐसे ही कड़े नियम अपनाने चाहिए. इसके अलावा उन्होंने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से हुई एक हालिया बातचीत का भी जिक्र किया.
ट्रंप के मुताबिक, भारतीय सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे हो सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट में लिखा कि भारत के पिछले आम चुनावों को देखा जाए तो वहां करीब 64.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया और हर किसी के पास एक वैलिड फोटो आईडी होना जरूरी था. ट्रंप ने इसी उदाहरण के आधार पर अमेरिकी कांग्रेस से SAVE अमेरिका एक्ट को जल्द पास करने की अपील की. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका में चुनावों में केवल अमेरिकी नागरिकों की भागीदारी होनी चाहिए.

आखिर क्या है SAVE America Act?

व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस प्रस्तावित कानून का समर्थन किया है. प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी चुनावों का फैसला सिर्फ अमेरिकी नागरिकों को करना चाहिए. SAVE America Act का उद्देश्य अमेरिकी संघीय चुनावों में वोट देने के लिए नागरिकता और पहचान से जुड़े नियमों को और सख्त करना है.

बता दें कि जो कानून प्रस्तावित किया गया है, वहां मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को वैलिड आईडी और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना होगा. इसके अलावा संघीय चुनावों में गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने का प्रस्ताव है. साथ ही इस कानून में डाक से मतदान पर भी कुछ सीमाएं लगाने की बात कही गई है. प्रस्ताव के मुताबिक बीमारी, दिव्यांगता, सैन्य सेवा या यात्रा जैसी कुछ विशेष परिस्थितियों में ही मेल-इन वोटिंग की अनुमति देने की बात कही गई है.

भारत-अमेरिका के चुनाव में क्या अंतर?

दरअसल, भारत और ब्राजील की चुनाव प्रणालियों का उदाहरण देते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि इन देशों में मतदाता  पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा गया है. वहीं अमेरिका में नागरिकता को लेकर प्रक्रिया काफी हद तक मतदाता के खुद दिए गए प्रमाण पर निर्भर करती है. बता दें कि सेव अमेरिका एक्ट को 29 जनवरी को कांग्रेस में पेश किया गया था. ट्रंप लंबे समय से इस कानून का समर्थन करते रहे हैं.  इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस भी जारी है. जहां एक धड़ा कह रहा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित होगी तो नहीं आलोचकों का कहना है कि जो वैलिड वोटर्स हैं, उन्हें भी इससे मुश्किल पेश आ सकती है.

 

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