सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की अनुमानित मांग करीब 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) थी, जबकि इसके मुकाबले सरकार ने लगभग 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की. सरकार के अनुसार, किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से वर्ष 2024-25 में उर्वरकों की रिकॉर्ड आपूर्ति की गई.
उर्वरक आपूर्ति में तालमेल की सफलता
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त व्यवस्था किसानों को सहयोग देने और देशभर में खेती की गतिविधियों को बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है. सरकार के मुताबिक, यह सफलता रेलवे, बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के आपसी तालमेल से संभव हो पाई. सरकारी बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे ने उर्वरक ढुलाई को प्राथमिकता दी, जिससे उर्वरक तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके.
बंदरगाह से खेत तक उर्वरक सप्लाई मजबूत
वहीं, बंदरगाहों पर आयात किए गए उर्वरकों को जल्दी उतारा गया और आगे भेजने की व्यवस्था की गई. इसके साथ ही सरकार ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया, ताकि उर्वरक सही समय पर किसानों तक पहुंच सकें. सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित कीं, मांग और आपूर्ति की स्थिति पर नियमित रूप से नजर रखी और जहां भी किसी तरह की दिक्कत सामने आई, उसे तुरंत दूर किया गया.
उर्वरकों की रिकॉर्ड उपलब्धता
इन पहले से की गई व्यवस्थाओं के चलते देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं होने दी गई. सरकार के मुताबिक, इसी समन्वित और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप FY24-25 के दौरान पूरे देश में रिकॉर्ड स्तर पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी. इसी बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल इसी समय 626.64 लाख हेक्टेयर था. इस तरह रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
दलहन व चना फसल में बढ़ोतरी
बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी से फसल उत्पादन के बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा और खाद्य महंगाई को काबू में रखने में भी मदद मिलेगी. आंकड़ों के मुताबिक, दलहनी फसलों के रकबे में 3.74 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जबकि चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर का उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है.
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