FPI Selling India 2026: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है. मई महीने की शुरुआत से लेकर 8 मई तक विदेशी निवेशकों ने करीब 14,232 करोड़ रुपये की बिकवाली कर दी है. यह ट्रेंड ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैश्विक कारकों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और यही वजह है कि वे भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. आने वाले समय में भी यह रुझान जारी रहने की आशंका जताई जा रही है.
2026 में अब तक भारी निकासी
अगर पूरे साल 2026 की बात करें तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली का आंकड़ा काफी बड़ा हो चुका है. एक्सचेंजों के माध्यम से अब तक एफपीआई कुल मिलाकर 2,18,540 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं, जो बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है. हालांकि, इस बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला है कि प्राथमिक बाजार यानी आईपीओ जैसे सेगमेंट में विदेशी निवेशकों की रुचि बनी हुई है. इस साल अब तक उन्होंने करीब 12,340 करोड़ रुपये का निवेश प्राथमिक बाजारों में किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे पूरी तरह से भारत से बाहर नहीं जा रहे, बल्कि चुनिंदा अवसरों पर दांव लगा रहे हैं.
सेक्टर आधारित निवेश में बदलाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, भले ही एफपीआई कुल मिलाकर बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन वे पूरी तरह से बाजार से बाहर नहीं हुए हैं. वे ऊर्जा, निर्माण और पूंजीगत वस्तुओं जैसे कुछ खास सेक्टरों में निवेश कर रहे हैं. इसके अलावा एक और बड़ा ट्रेंड यह देखने को मिल रहा है कि विदेशी निवेशक अब मिड-कैप और चुनिंदा स्मॉल-कैप शेयरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. इन शेयरों में उन्हें ज्यादा ग्रोथ की संभावना नजर आ रही है और हाल के समय में इनका प्रदर्शन भी बेहतर रहा है.
वैश्विक कारणों का असर
भारत में मुद्रा अवमूल्यन और कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर चिंता भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का एक प्रमुख कारण बनी हुई है. इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों का भी असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है. खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में तेजी के कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बेहतर रिटर्न की उम्मीद बढ़ी है, जिससे विदेशी निवेशकों का झुकाव इन देशों की ओर बढ़ा है और भारत से पूंजी का आंशिक बहिर्गमन देखने को मिल रहा है.
हफ्ते के दौरान बदलता रुख
हाल ही में आए राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद विदेशी निवेशकों का रुख थोड़े समय के लिए सकारात्मक भी हुआ था. केंद्र में सत्तारूढ़ दल के मजबूत प्रदर्शन से बाजार में भरोसा बढ़ा और सप्ताह की शुरुआत में एफपीआई ने खरीदारी भी की. हालांकि, यह सकारात्मक माहौल ज्यादा समय तक नहीं टिक सका. भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते सप्ताह के बाकी चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध विक्रेता बन गए.
आगे भी बना रह सकता है दबाव
बजाज ब्रोकिंग के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी निवेशकों का रुख जल्द बदलने की संभावना कम है. उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची तेल कीमतें और कमजोर रुपया आने वाले महीनों में भी एफपीआई के फैसलों को प्रभावित करते रहेंगे. ऐसे में इस साल के बाकी समय में भी विदेशी निवेशकों के शुद्ध विक्रेता बने रहने की संभावना बनी हुई है.
बाजार का प्रदर्शन कैसा रहा
इस बीच, भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. निफ्टी ने पिछले सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में कारोबार किया, लेकिन इसके बावजूद लगातार दूसरे सप्ताह 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ. यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार को सहारा दे रहा है, भले ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी हो.
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