Fuel Tax in India: पाकिस्तान में फ्यूल टैक्स और डीजल की बढ़ती लागत को लेकर ट्रांसपोर्टर्स का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. ‘ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट एलायंस’ ने 12 अगस्त 2026 से देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है. ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से जरूरी सामान की सप्लाई और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इस हड़ताल की बड़ी वजह सरकार की ओर से हाई-स्पीड डीजल पर पेट्रोलियम लेवी बढ़ाना भी बताया जा रहा है. पाकिस्तान सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर पेट्रोलियम लेवी बढ़ाकर 74.28 रुपये प्रति लीटर कर दी है. इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने सरकार के सामने फ्यूल टैक्स और कीमतों से जुड़ी कई मांगें रखी हैं.
भारत या पाकिस्तान, कहां फ्यूल टैक्स सबसे ज्यादा?
पाकिस्तान में पेट्रोल पर टैक्स और ड्यूटी को मिलाकर करीब 114 रुपये प्रति लीटर का बोझ बताया गया है. वहीं भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स को मिलाकर पेट्रोल की कुल कीमत का करीब 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में जाने की बात कही गई है. पाकिस्तान में फ्यूल टैक्स में सबसे बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम लेवी का है, जो करीब 80 रुपये प्रति लीटर बताया गया है. इसके अलावा सरकार आयातित कच्चे तेल पर करीब 21.24 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी लगाती है. पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त वसूले जाते हैं. इस तरह पाकिस्तान में पेट्रोल की कुल कीमत का करीब 32 से 35 प्रतिशत हिस्सा सरकारी टैक्स और लेवी के रूप में जाने की बात कही जा रही है.
भारत में क्या है फ्यूल टैक्स का गणित?
भारत में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी टैक्स लगाती हैं. पेट्रोल की औसत कीमत करीब 95 से 105 रुपये प्रति लीटर बताई जाती है, जिसमें लगभग 45 से 50 रुपये तक टैक्स शामिल है. मौजूदा समय में पेट्रोल पर केंद्र सरकार की ओर से करीब 3 से 3.5 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है. इसके अलावा अलग-अलग राज्य ईंधन पर अपने स्तर पर वैट वसूलते हैं, जो पेट्रोल की कीमत को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारण है. इसके साथ ही प्रति लीटर पेट्रोल पर करीब 3.80 रुपये का डीलर कमीशन भी जुड़ता है. इस तरह कुल टैक्स बोझ और प्रतिशत के हिसाब से देखें तो भारत में ईंधन पर टैक्स पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा बताया जा रहा है.
फिर पाकिस्तान में क्यों हड़ताल?
- पाकिस्तान में टैक्स भले ही भारत से कम है, लेकिन राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कई बड़े कारण हैं.
- भारत के मुकाबले पाकिस्तान में नागरिकों की क्रय शक्ति और करेंसी की वैल्यू कम है. ऐसे में ईंधन पर 114 रुपये का टैक्स भी उनके लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है.
- पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के आधार पर हर रोज सुबह पेट्रोल-डीजल के दाम बदल दिए जाते हैं. इससे ट्रांसपोर्टर्स के लिए माल ढुलाई का किराया तय करना मुश्किल हो रहा है. उनकी मांग है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव रोजाना के बजाय मासिक आधार पर किया जाए.
- ट्रांसपोर्टर्स की सबसे बड़ी मांग डीजल पर टैक्स कम करने की है. वे चाहते हैं कि डीजल पर लगने वाले सरकारी टैक्स को तुरंत घटाकर 1 जुलाई 2024 के स्तर पर कर दिया जाए.
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