Processed Food Export India: भारत में बने प्रोसेस्ड फूड उत्पादों की वैश्विक मांग पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है. इसके चलते देश के कुल कृषि-खाद्य निर्यात में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 20.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि 2014-15 में यह 13.7% थी. शुक्रवार को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. सरकार ने बताया कि प्रोसेस्ड फूड सेक्टर संगठित मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में प्रमुख रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है और कुल संगठित रोजगार में इसकी हिस्सेदारी 12.83% तक पहुंच चुकी है.
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बना विकास का इंजन
प्रोसेस्ड फूड सेक्टर की ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) FY23-24 में बढ़कर 2.24 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि FY14-15 में 1.34 करोड़ रुपए थी. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2014 से मार्च 2025 के दौरान इस क्षेत्र में 7.33 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हुआ है. मंत्रालय ने कहा, “खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि आय बढ़ाने और कृषि से इतर रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही संरक्षण और प्रसंस्करण अवसंरचना में कृषि और संबद्ध क्षेत्र के उत्पादन में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है.”
PMKSY से बढ़ी प्रोसेसिंग क्षमता
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना को 14वें वित्त आयोग के दौरान 2016–20 की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी गई थी, जिसे बाद में 2020–21 तक बढ़ाया गया. इसके बाद पुनर्गठन के साथ 15वें वित्त आयोग चक्र में इसे 6,520 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ आगे बढ़ाने की स्वीकृति दी गई. मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक पीएमकेएसवाई की विभिन्न घटक योजनाओं के तहत 36 नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जबकि 94 परियोजनाएं पूरी होकर चालू हो चुकी हैं, जिससे देश की प्रसंस्करण और भंडारण क्षमता बढ़कर 28.48 लाख मीट्रिक टन हो गई है.
इन स्वीकृत परियोजनाओं के पूरी तरह लागू होने पर करीब 365.21 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश आने की उम्मीद है, जिससे लगभग 1.4 लाख किसानों को लाभ मिलेगा और 9,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.
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