Highway Development: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद को जानकारी दी कि बीते पांच वर्षों में सरकार ने कुल 57,125 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है. इस दौरान औसतन हर साल 34,215 लेन-किलोमीटर सड़कें बनाई गईं. राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक 18,000 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे को चालू करने का है. इसके अलावा 2032-33 तक कुल 26,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए टेंडर जारी करने की योजना भी तय की गई है.
रिंग रोड, बाइपास और पोर्ट कनेक्टिविटी पर फोकस
मंत्री ने कहा कि पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के रिंग रोड और बाइपास का विकास प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. इसके अलावा पोर्ट कनेक्टिविटी को शिपिंग मंत्रालय की प्राथमिकता के अनुसार और औद्योगिक नोड्स से कनेक्टिविटी को नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की प्राथमिकता के अनुसार विकसित किया जा रहा है. गडकरी ने कहा कि इन विकास कार्यों से लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ेगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अर्थव्यवस्था का मुख्य प्रेरक है और यह तेज विकास में अहम योगदान देता है.
एनएच नेटवर्क और एक्सप्रेसवे में बड़ा इजाफा
उन्होंने बताया कि देश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की लंबाई मार्च 2014 में 91,287 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर हो गई है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग मुख्य रूप से लंबी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए होते हैं. सालों में बढ़े बजटीय आवंटन के चलते सड़कों की गुणवत्ता में भी काफी सुधार हुआ है. ऑपरेशनल एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर HSCs या एक्सप्रेसवे की लंबाई 2014 में 93 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 3,052 किलोमीटर हो गई है. वहीं चार लेन और उससे अधिक वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की लंबाई 2014 में 18,371 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 48,568 किलोमीटर हो गई है, यानी इसमें करीब 2.6 गुना वृद्धि हुई है.
कम लेन वाले एनएच घटे, रोजगार और लॉजिस्टिक्स को फायदा
इसके अलावा 2014 में 2 लेन से कम वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का अनुपात करीब 30 प्रतिशत था, जो अब घटकर कुल एनएच नेटवर्क का केवल 9 प्रतिशत रह गया है. इन विकास कार्यों से देश के शहरी, ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, साथ ही लॉजिस्टिक्स की दक्षता भी बढ़ी है. IIT कानपुर के एक अध्ययन के अनुसार 1 लेन-किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से 4,478 व्यक्ति-दिन का प्रत्यक्ष रोजगार और 5,297 व्यक्ति-दिन का अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होता है. वहीं लंबी अवधि में हाईवे निर्माण का प्रभाव और भी व्यापक होता है, जहां 7 वर्षों की अवधि में प्रति लेन-किलोमीटर करीब 52,393 व्यक्ति-दिन रोजगार का सृजन होता है, जो क्षेत्र में बढ़ी आर्थिक गतिविधियों का नतीजा है.
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