बजट में किए गए हल्के फिस्कल कंसोलिडेशन से GDP ग्रोथ पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

जीडीपी के अनुपात में सरकार की रेवेन्यू हिस्सेदारी भले ही घटी हो, लेकिन सब्सिडी और मौजूदा योजनाओं पर खर्च में कटौती कर इसकी भरपाई कर ली गई है. इसी वजह से बीते छह वर्षों में फिस्कल कंसोलिडेशन सबसे कम स्तर पर रहा है, जिसे आर्थिक ग्रोथ के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. यह बात एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में कही गई है. एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में फिस्कल कंसोलिडेशन की रफ्तार छह सालों में सबसे धीमी रहेगी. वहीं, बजट में डिसइन्वेस्टमेंट (सरकारी हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाना) से मिलने वाली राशि में भी छह वर्षों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान है.

फिस्कल इम्पल्स और सेवा क्षेत्र पर जोर

रिसर्च फर्म ने कहा कि केंद्र सरकार फिस्कल कंसोलिडेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन वित्त वर्ष 2027 के लिए यह रास्ता थोड़ा नरम रखा गया है. इससे फिस्कल इम्पल्स कई वर्षों बाद नकारात्मक से न्यूट्रल होने की संभावना है, जिसे जीडीपी ग्रोथ के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में सेवा क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है. इसके तहत मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों, पर्यटन, खेल अवसंरचना और क्रिएटिव इकोनॉमी के लिए बड़े और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, साथ ही इन क्षेत्रों में खर्च भी बढ़ाया गया है.

हाई-स्पीड रेल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा

इसके अलावा, शहरी अवसंरचना को गति देने के लिए भी कदम उठाए गए हैं, जहां प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) को अगले पांच वर्षों में 50 अरब रुपये देने का प्रावधान किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जो बड़े शहरों को जोड़ेंगे. इसके अलावा, जो बड़े शहर 10 अरब रुपए से ज्यादा के म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करेंगे, उन्हें 1 अरब रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. रिपोर्ट में नीति से जुड़ी प्राथमिकताओं पर भी रोशनी डाली गई है. बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, रेयर अर्थ कॉरिडोर, केमिकल पार्क, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग और हाई-टेक टूल रूम जैसे उभरते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को बजट में विशेष बढ़ावा दिया गया है.

टैक्स कलेक्शन और फिस्कल डेफिसिट का अनुमान

रिपोर्ट के मुताबिक, डायरेक्ट टैक्स—जैसे इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स—की ग्रोथ नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से तेज रहने की संभावना है, जबकि इनडायरेक्ट टैक्स की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है. कुल मिलाकर, ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू में सालाना लगभग 8 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य तय किया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए यह 4.4 प्रतिशत आंका गया है. वहीं, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है.

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