India Commercial Vehicle Sales FY27: भारत का कमर्शियल वाहन सेक्टर एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ता दिख रहा है. मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश और ई-कॉमर्स सेक्टर की तेजी के चलते यह उद्योग आने वाले समय में नया रिकॉर्ड बना सकता है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में कमर्शियल वाहनों की बिक्री 12.4 लाख यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा.
रिकॉर्ड की ओर बढ़ता बाजार
CRISIL Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इस सेक्टर ने 13 प्रतिशत की मजबूत रिकवरी दर्ज की थी. हालांकि इस ऊंचे आधार के चलते वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ दर थोड़ी धीमी होकर 5 से 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसके बावजूद कुल बिक्री नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है और वित्त वर्ष 2019 के पिछले उच्चतम स्तर को पार कर सकती है.
घरेलू मांग से मिलेगा सबसे बड़ा सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक इस सेक्टर की ग्रोथ में घरेलू बाजार की भूमिका सबसे अहम रहेगी. कुल वॉल्यूम में करीब 92 प्रतिशत हिस्सा घरेलू मांग का है, जो इस उद्योग को लगातार मजबूती दे रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर और खनन गतिविधियों में तेजी, स्थिर रिप्लेसमेंट डिमांड और जीएसटी दरों में कटौती जैसे कारकों ने खरीद को आसान बनाया है. इसके अलावा ब्याज दरों में नरमी और माल ढुलाई के बेहतर उपयोग ने भी इस सेक्टर की रिकवरी को मजबूत किया है.
LCV और MHCV सेगमेंट का ट्रेंड
कमर्शियल वाहन उद्योग को मुख्य रूप से हल्के कमर्शियल वाहन (LCV) और मध्यम व भारी कमर्शियल वाहन (MHCV) में बांटा जाता है. रिपोर्ट के अनुसार LCV सेगमेंट, जो कुल वॉल्यूम का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा रखता है, ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की बढ़ती मांग के चलते 5 से 6 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है. वहीं MHCV सेगमेंट में 4 से 5 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान है, जिसे माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च से समर्थन मिलेगा.
बस सेगमेंट में भी बढ़ेगी रफ्तार
वित्त वर्ष 2027 में बसों के सेगमेंट में 3 से 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है. इस ग्रोथ के पीछे रिप्लेसमेंट डिमांड और सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक बसों की खरीद अहम भूमिका निभाएगी. हालांकि बस सेगमेंट अभी छोटा है, लेकिन इसमें इलेक्ट्रिफिकेशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बड़ा बदलाव ला सकता है.
निर्यात पर रहेगा दबाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों के कारण निर्यात पर दबाव बना रह सकता है. फिलहाल कुल वॉल्यूम में निर्यात का हिस्सा करीब 8 प्रतिशत है. जहां वित्त वर्ष 2026 में इसमें करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसकी रफ्तार घटकर 2 से 4 प्रतिशत तक रह सकती है.
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