भारतीय कंपनियों की आय FY27 की पहली तिमाही में 8.5% बढ़ने का अनुमान: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत की कंपनियों की आय वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8 से 8.5 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई गई है. शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान सामने आया है, जो यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता बनी हुई है और कंपनियों की कमाई में संतुलित वृद्धि जारी रह सकती है.

पिछली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में आय वृद्धि सालाना आधार पर 8.5 से 9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट में बताया गया कि वस्तु एवं सेवा कर में कटौती के कारण ऑटोमोबाइल और व्हाइट गुड्स सेक्टर में मजबूत मांग देखने को मिली, जिससे वॉल्यूम में बढ़त हुई और आय को सहारा मिला.

पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ सकती है चुनौती

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में आय वृद्धि थोड़ी कम रहने का अनुमान है. इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिसके चलते ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और इसका सीधा असर मांग पर पड़ सकता है.

संघर्ष का असर पहले ही दिखने लगा

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान ही इस क्षेत्र से जुड़े सेक्टर्स में संघर्ष का असर दिखाई देने लगा था. यह प्रभाव आने वाली तिमाहियों, खासकर वित्त वर्ष 2027 की पहली दो तिमाहियों में और ज्यादा स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है.

ऊर्जा निर्भरता से बढ़ती संवेदनशीलता

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए पश्चिम एशिया ऊर्जा, व्यापार और प्रेषण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 89 प्रतिशत जरूरतों का आयात करता है, जिसमें से करीब 46 प्रतिशत रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

एलपीजी आयात पर भी बड़ी निर्भरता

देश अपनी लगभग आधी जरूरतों के लिए एलपीजी आयात पर निर्भर है, जिसमें से आधे से अधिक इसी मार्ग से होकर आता है. एलपीजी के मामले में संवेदनशीलता और भी अधिक है, क्योंकि आयात घरेलू मांग का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पूरा करता है और इसका बड़ा हिस्सा भी होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है.

निर्यात पर भी पड़ सकता है असर

ऊर्जा के अलावा पश्चिम एशिया भारत के लिए एक अहम आर्थिक गलियारा भी है, जहां देश के कुल निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत जाता है. रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र, साथ ही चावल और मांस जैसी प्रसंस्कृत खाद्य श्रेणियां इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर हैं, जिससे यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर व्यापार पर भी पड़ सकता है.

कुल मिलाकर संतुलित लेकिन सतर्क माहौल

कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकेत देती है कि कंपनियों की आय में वृद्धि जारी रह सकती है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण चुनौतियां बनी रहेंगी. ऐसे में आने वाले समय में बाजार और उद्योग दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी होगा.

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