भारत में FY26 में 61% बढ़ी क्रेडिट ग्रोथ, रिटेल और MSME से मिली मजबूती: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कर्ज वितरण में बड़ी तेजी देखने को मिली है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में क्रेडिट ग्रोथ 61 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जो हाल के वर्षों में सबसे तेज वृद्धि में से एक मानी जा रही है. इस उछाल के पीछे रिटेल ग्राहकों और MSME सेक्टर की मजबूत मांग को प्रमुख कारण बताया गया है.

कुल क्रेडिट फ्लो 25 लाख करोड़ पार

Yes Bank की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कुल क्रेडिट फ्लो बढ़कर 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए के डिपॉजिट के बराबर है. यह दर्शाता है कि बैंकिंग सिस्टम में लोन की मांग काफी मजबूत बनी हुई है.

किन सेक्टरों ने बढ़ाई रफ्तार

रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटेल, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है. खासतौर पर रिटेल लोन की मांग में तेजी ने बैंकिंग सेक्टर को नई गति दी है. हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने से लिक्विडिटी पर थोड़ा दबाव जरूर देखने को मिला है.

10 साल के उच्च स्तर पर C/D रेशियो

क्रेडिट-डिपॉजिट (C/D) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले 10 वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है. यह संकेत देता है कि बैंक अधिक मात्रा में लोन दे रहे हैं, जबकि डिपॉजिट की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है.

रिटेल लोन बना सबसे बड़ा ड्राइवर

रिटेल लोन इस ग्रोथ का सबसे बड़ा हिस्सा बनकर उभरा है. पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है. टैक्स में राहत और जीएसटी से जुड़े फायदों के कारण लोगों की आय में सुधार हुआ है, जिससे लोन लेने की क्षमता भी बढ़ी है.

वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को पछाड़ा

इस सेगमेंट में वाहन लोन सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही से वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को भी पीछे छोड़ दिया है, जो बदलते उपभोक्ता ट्रेंड को दर्शाता है.

सुरक्षित लोन की ओर बढ़ा रुझान

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब लोग सुरक्षित (secured) लोन की ओर ज्यादा झुक रहे हैं, जबकि बिना गारंटी वाले (unsecured) लोन की ग्रोथ धीमी हो गई है. इससे बैंकिंग सिस्टम की जोखिम प्रोफाइल भी बेहतर होती दिखाई दे रही है.

MSME सेक्टर की मजबूत भूमिका

इंडस्ट्रियल क्रेडिट में भी सुधार देखने को मिला है, जिसमें MSME सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है. अब यह सेक्टर कुल औद्योगिक कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है. सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम और MSME की नई परिभाषा ने इस ग्रोथ को मजबूत किया है. माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया.

आगे के लिए चेतावनी भी

हालांकि रिपोर्ट में आगे के लिए कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है. वित्त वर्ष 2027 में क्रेडिट ग्रोथ धीमी पड़ सकती है. इसके पीछे बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर एक्सपोर्ट और खाद्य महंगाई जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. इसके अलावा, जीएसटी से मिलने वाले फायदे का असर कम होने से भी लोन की मांग पर असर पड़ सकता है.

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