भारत का ऑनलाइन रिटेल बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में यह देश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है. बेन एंड कंपनी और फ्लिपकार्ट की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-रिटेल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 2025 में बढ़कर 65-66 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि मौजूदा वृद्धि दर को देखते हुए यह बाजार 2030 तक 170-180 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है.
2025 में मजबूत ग्रोथ, उपभोग में तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ई-रिटेल GMV में 19-21% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई. इस तेजी के पीछे बेहतर आर्थिक परिस्थितियां और मजबूत उपभोक्ता भावना प्रमुख कारण रहे. इसी दौरान देश में निजी उपभोग में 10.5% की वृद्धि देखी गई, जो जीएसटी में कटौती, आयकर में राहत, महंगाई में कमी और ब्याज दरों में गिरावट जैसे कारकों से संभव हो पाई. इन सुधारों के चलते पूरे साल बाजार में तेजी बनी रही और दूसरी छमाही में 22-24% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.
2026 में भी जारी रह सकती है तेजी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली तिमाही में भी 23-25% की वृद्धि का अनुमान है. यह संकेत देता है कि उपभोग और विवेकाधीन खर्च (Discretionary Spending) में रिकवरी जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आर्थिक माहौल इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो ई-रिटेल सेक्टर आने वाले वर्षों में लगातार मजबूत प्रदर्शन करता रहेगा.
क्विक कॉमर्स बना गेम चेंजर
ई-रिटेल सेक्टर में सबसे तेज उभरता हुआ सेगमेंट क्विक कॉमर्स है, जिसमें 30 मिनट से कम समय में डिलीवरी की सुविधा मिलती है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में यह सेगमेंट सालाना दोगुनी गति से बढ़ा है और 2025 में इसका GMV 10-11 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. आने वाले समय में इसकी रफ्तार और तेज हो सकती है, और 2030 तक यह 65-70 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है.
पारंपरिक ई-रिटेल की बनी रहेगी पकड़
हालांकि क्विक कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पारंपरिक ई-रिटेल का दबदबा बना रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भी कुल बाजार में पारंपरिक ई-रिटेल की हिस्सेदारी 60-65% के आसपास बनी रहेगी. यह दर्शाता है कि दोनों मॉडल साथ-साथ विकसित होंगे और उपभोक्ताओं को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से विकल्प मिलते रहेंगे.
वैश्विक उपभोग केंद्र बनता भारत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत तेजी से एक वैश्विक उपभोग केंद्र के रूप में उभर रहा है. अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक उपभोग वृद्धि के हर 8 डॉलर में से 1 डॉलर भारत से आएगा. यह संकेत देता है कि भारत का उपभोक्ता बाजार दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है.
खरीदारों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी
ई-रिटेल सेक्टर में खरीदारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पिछले पांच वर्षों में यह संख्या दोगुनी से अधिक होकर 2025 तक 290-300 मिलियन तक पहुंच गई है. इस वृद्धि के पीछे विक्रेता पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार और छोटे शहरों तक पहुंच का बढ़ना मुख्य कारण है.
Gen Z बना सबसे बड़ा ड्राइवर
रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z (युवा उपभोक्ता वर्ग) अब ई-रिटेल बाजार का सबसे बड़ा ड्राइवर बन चुका है. 2025 में कुल खरीदारों में Gen Z की हिस्सेदारी 40-45% रही और उन्होंने कुल ऑर्डर्स का लगभग आधा योगदान दिया. खास बात यह है कि मेट्रो शहरों में प्रति खरीदार खर्च अन्य वर्गों की तुलना में 2.5 गुना तेजी से बढ़ा है. मनन भासिन ने कहा: “क्विक कॉमर्स में खरीदारी का व्यवहार अलग होता है. यहां चेकआउट की गति तेज होती है और कन्वर्जन भी ज्यादा होता है. खरीदारी सत्र पांच मिनट से भी कम समय का होता है, जो पारंपरिक ई-कॉमर्स का लगभग आधा है.”
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