विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत: RBI

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत की GDP मजबूत बनी हुई है और देश आगे भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से दी गई है. RBI ने बताया कि बाहरी जोखिमों के असर को कम करने के लिए भारत ने हाल के वर्षों में अपने निर्यात का तेजी से विविधीकरण किया है. केंद्रीय बैंक ने मासिक बुलेटिन में कहा कि फिलहाल भारत यूरोपीय संघ, खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और अमेरिका सहित लगभग 50 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 देशों या समूहों के साथ व्यापार वार्ताएं कर रहा है.

FY25-26 के अग्रिम अनुमान में अर्थव्यवस्था मजबूत

आरबीआई ने बुलेटिन में कहा कि FY25-26 के पहले अग्रिम अनुमान दिखाते हैं कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. दिसंबर के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी इंडीकेटर्स विकास की गति में निरंतर तेजी का संकेत देते हैं, साथ ही मांग की स्थिति भी सकारात्मक बनी हुई है. आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, लेकिन यह तय की गई सीमा के भीतर ही रही. पिछले एक साल के दौरान वाणिज्यिक क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़ा है, जिसमें बैंकिंग और गैर-बैंकिंग दोनों स्रोतों की अहम भूमिका रही है.

व्यापार वार्ताएं और आर्थिक सुधारों से बढ़ी उम्मीद

दिसंबर महीने में भारत ने न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार वार्ताएं सफलतापूर्वक पूरी कीं. इसके अलावा, वर्ष 2025 के दौरान कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार लागू किए गए, जिनमें कर संरचना का युक्तिकरण, श्रम बाजार सुधारों के तहत श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और वित्तीय क्षेत्र का उदारीकरण शामिल है. इन कदमों से देश की विकास संभावनाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है. आरबीआई की भारत में बैंकिंग की प्रवृत्तियां और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट में भी कहा गया है कि मजबूत पूंजी भंडार, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत मुनाफे के चलते भारत का बैंकिंग सिस्टम स्थिर और मजबूत बना हुआ है.

दीर्घकालिक विकास के लिए संतुलित नीति जरूरी

आरबीआई ने कहा कि आगे चलकर नवाचार और स्थिरता, उपभोक्ता संरक्षण और विनियमन एवं पर्यवेक्षण के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित नीति उत्पादकता बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन देने में सहायक सिद्ध होगी.


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